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फर्जी जाति प्रमाण पत्र के माध्यम से सैकड़ो एकड़ जमीन की रजिस्ट्री

विधानसभा में जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू ने उठाया मुद्दा

जांजगीर-सक्ती। सक्ती जिले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सैकड़ों एकड़ भूमि की रजिस्ट्री और डोलोमाइट खनन से जुड़े कथित अनियमितताओं का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है। विधायक बालेश्वर साहू द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने स्वीकार किया कि मामले की जांच के लिए जिला स्तरीय जांच दल गठित किया गया है और जांच प्रक्रिया जारी है।मंत्री ने बताया कि तहसीलदार जैजैपुर के पत्र क्रमांक 1078 दिनांक 10 अक्टूबर 2022 के आधार पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाकर सैकड़ों एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कराने की शिकायत मिली थी। इस शिकायत की जांच के लिए 20 मई 2026 को जिला स्तरीय जांच टीम का गठन किया गया। सरकार ने विधानसभा में यह भी बताया कि ग्राम खम्हरिया, तहसील भोथिया निवासी प्रदीप तिर्की के नाम दर्ज भूमि को विक्रय की अनुमति मिलने के बाद डोलोमाइट माइंस कॉर्पोरेशन के साझेदार के पक्ष में विक्रय किया गया। संबंधित भूमि के कुछ हिस्सों पर वर्ष 2021 से 2031 तक डोलोमाइट खनन की स्वीकृति भी संचालित है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र, भूमि विक्रय और खनन से जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच अभी जारी है और अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा। विधानसभा में उठाए गए एक अन्य प्रश्न के जवाब में राजस्व मंत्री ने बताया कि ग्राम पंचायत झालरौंदा, तहसील भोथिया में डोलोमाइट खनन के लिए चिन्हित क्षेत्र में सरकारी भूमि के नामांतरण की शिकायतें भी प्राप्त हुई हैं। प्रारंभिक जांच में तहसीलदार भोथिया की रिपोर्ट के अनुसार खसरा नंबर 19/1, 19/2, 226, 227, 228, 228/1 और 229 राजस्व अभिलेखों में शासकीय भूमि (छोटे झाड़ के जंगल एवं घास मद) के रूप में दर्ज हैं। शिकायत में अन्य खसरा नंबरों के नामांतरण पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिनकी जांच के लिए जिला स्तरीय जांच दल गठित किया गया है। राजस्व मंत्री ने सदन को बताया कि दोनों मामलों में जांच प्रक्रिया प्रचलित है और जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  अब उठ रहे हैं बड़े सवाल

यदि शिकायत वर्ष 2022 में हुई थी तो जांच दल 2026 में क्यों गठित किया गया? फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर यदि जमीन की रजिस्ट्री हुई, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सरकारी भूमि के नामांतरण और खनन की अनुमति मिलने तक निगरानी तंत्र क्या करता रहा? जांच पूरी होने में और कितना समय लगेगा तथा दोषियों पर कब कार्रवाई होगी? फिलहाल, यह मामला अब केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजस्व प्रशासन, जाति प्रमाण पत्र सत्यापन और खनन अनुमति की पूरी प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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