जांजगीर-चांपा में प्राकृतिक आपदा भी ‘कमाई का जरिया’? मुआवजा दिलाने के नाम पर सक्रिय बिचौलियों के नेटवर्क पर उठे सवाल प्रशाशन भी करे कड़ाई से पालन।

जांजगीर-चांपा में प्राकृतिक आपदा भी ‘कमाई का जरिया’? मुआवजा दिलाने के नाम पर सक्रिय बिचौलियों के नेटवर्क पर उठे सवाल प्रशाशन भी करे कड़ाई से पालन।
जांजगीर-चांपा। बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा घोटाले में डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद अब जांजगीर-चांपा जिले में भी प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटना मुआवजा मामलों में सक्रिय कथित बिचौलियों के नेटवर्क को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभिन्न वर्गों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या जिले में भी मुआवजा प्रक्रिया के नाम पर बिचौलियों का समानांतर तंत्र काम कर रहा है? यदि हां, तो इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
बताया जाता है कि प्राकृतिक आपदा, सर्पदंश, आकाशीय बिजली, सड़क दुर्घटना या अन्य मुआवजा योग्य घटनाओं के बाद कुछ लोग खुद को समाजसेवी, कानूनी सलाहकार या प्रभावशाली व्यक्ति बताकर पीड़ित परिवारों तक पहुंचते हैं। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि वे सरकारी कार्यालयों में फाइल जल्दी पास कराने या प्रक्रिया आसान कराने का भरोसा देकर पैसे की मांग करते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऐसे मामलों की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति पोस्टमार्टम रिपोर्ट, दस्तावेजों या मुआवजा प्रक्रिया को प्रभावित करने का दावा करता है, तो वह ऐसा किसके भरोसे करता है? यह सवाल प्रशासनिक व्यवस्था, अस्पतालों और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी प्रश्न खड़े करता है। यदि ऐसे दावे सही हैं, तो यह केवल बिचौलियों का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का विषय बन जाता है।बिलासपुर में फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आरोपों में हुई कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि जांच एजेंसियां अब ऐसे मामलों को गंभीरता से ले रही हैं। ऐसे में जांजगीर-चांपा जिले में भी पिछले वर्षों के प्राकृतिक आपदा मुआवजा प्रकरणों, पोस्टमार्टम रिपोर्टों और स्वीकृत मुआवजा फाइलों की सघन जांच की मांग उठने लगी है।जानकारों का कहना है कि यदि प्रत्येक मुआवजा प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पूरी प्रक्रिया डिजिटल एवं पारदर्शी बनाई जाए, तो वास्तविक पीड़ित परिवारों को बिना किसी बिचौलिए के उनका अधिकार मिल सकेगा। साथ ही यदि किसी स्तर पर अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी संभव होगी।
जनता के लिए जरूरी संदेश
प्राकृतिक आपदा, सर्पदंश, दुर्घटना या किसी भी सरकारी मुआवजा योजना का लाभ लेने के लिए किसी भी बिचौलिए, तथाकथित समाजसेवी, वकील या दलाल को पैसे देने की आवश्यकता नहीं होती। शासन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत पात्र हितग्राही सीधे आवेदन कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि दुख की घड़ी में कई लोग सहानुभूति का दिखावा कर पीड़ित परिवारों को अपने झांसे में लेते हैं और मुआवजे का लालच देकर मोटी रकम वसूलने का प्रयास करते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति मुआवजा दिलाने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलवाने, फाइल जल्दी पास कराने या किसी अधिकारी से विशेष पहुंच होने का दावा कर पैसे मांगता है, तो उसकी सूचना तत्काल पुलिस, जिला प्रशासन या संबंधित विभाग को दें।
जागरूक नागरिक ही बिचौलियों पर सबसे बड़ी रोक हैं। जब लोग सीधे सरकारी प्रक्रिया अपनाएंगे, तभी वास्तविक हितग्राहियों को पूरा लाभ मिलेगा और भ्रष्टाचार तथा फर्जीवाड़े पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।











