स्कूल पहुंचे कुम्हार, बच्चों ने सीखा माटी कला का हुनर
शाासकीय पूर्व माध्यमिक शाला नवापारा (अमोदा) में नवाचार का आयोजन

जांजगीर-चाम्पा। शाासकीय पूर्व माध्यमिक शाला नवापारा (अमोदा) में बस्ता विहीन दिवस (बैगलेस डे) की गतिविधि के तहत एक अनोखी पहल की गई। शिक्षक सूर्यवंशी के मार्गदर्शन में स्थानीय कुम्हार को चाक सहित विद्यालय में आमंत्रित किया गया। इस दौरान बच्चों को मिट्टी से खिलौने, बर्तन और विभिन्न कलाकृतियां बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। सीखे कुम्हार ने बच्चों के सामने चाक चलाकर मिट्टी को सुंदर आकार देना सिखाया। बच्चों ने अपने हाथों से मिट्टी को गूंथकर कई तरह की आकृतियां बनाईं। नवाचारी शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि वह सत्र 2023-24 में सीसीआरटी क्षेत्रीय केंद्र हैदराबाद से प्रशिक्षित शिक्षक है। इस दौरान उन्होंने कठपुतली कला, मिट्टी कला और शैक्षिक भ्रमण के माध्यम से विभिन्न राज्यों की संस्कृति व कला कौशलों को सीखा था, जिसका सफल क्रियान्वयन अब वे अपने विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कर रहे हैं। विद्यालय के प्रधान पाठक ने बताया कि इस गतिविधि से बच्चे अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति से रूबरू हुए। वही शिक्षक राजेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि सीसीआरटी हैदराबाद के राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण में सीखी गई कलाओं का उद्देश्य बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ाना है। बस्ता विहीन शनिवार के दिन इस तरह की व्यावहारिक गतिविधियों से बच्चे बिना किसी तनाव के खेल-खेल में नया हुनर सीख रहे हैं, जिससे उनमें कला के प्रति रुचि जागृत हो रही है। शिक्षक ने बताया कि सीसीआरटी से प्राप्त प्रशिक्षण के बाद स्कूली बच्चों में सांस्कृतिक एकीकरण, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझाना, बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारना, छात्रों में भारत की क्षेत्रीय संस्कृतियों का महत्व समझाते हुए राष्ट्रीय एकता की भावना जगाना तथा व्यावहारिक व खेल-आधारित शिक्षा प्रदान करने का प्रयत्न जारी है ताकि पढ़ाई को तनावमुक्त, जीवंत और आनंददायक बनाया जा सके।











