फाइलों पर ताला, फरियादी बेहाल… शिक्षा विभाग में किसकी चल रही है चाल?कुर्सी सरकारी, सवालों की बौछार… सहायक ग्रेड-3 किसलय धृतलहरे पर गंभीर आरोप,,,
जांजगीर-चांपा”जब दफ्तर का दरवाजा बंद हो, तो शिकायतों का दरवाजा अपने आप खुल जाता है…”
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चाओं के केंद्र में हैं सहायक ग्रेड-3 किसलय धृतलहरे, जिन पर कार्यालयीन कार्यों में लापरवाही, आरटीआई आवेदनों का समय पर निराकरण नहीं करने और फरियादियों को परेशान करने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि स्थापना, डीएमएफ और सेजेस जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं का काम देखने के बावजूद उनका कक्ष अक्सर बंद रहता है। शिक्षक, कर्मचारी, स्कूल संचालक और आरटीआई कार्यकर्ता कई-कई चक्कर लगाने के बाद भी अपने कार्य नहीं करा पा रहे हैं।
आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि सूचना समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती और अपील संबंधी मामलों का भी निर्धारित समय सीमा में निराकरण नहीं होता, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।विभागीय गलियारों में यह भी चर्चा है कि कार्यालयीन समय में सरकारी कार्यों की बजाय निजी कार्यों में अधिक व्यस्त रहने से कार्यालय की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।कुछ निजी स्कूल संचालकों ने यह भी आरोप लगाया है कि ट्रूकॉलर पर स्वयं को “DEO” लिखकर प्रदर्शित किए जाने से भ्रम की स्थिति बनती है। साथ ही फोन के माध्यम से अवैध वसूली की कोशिश किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो वे इस संबंध में लिखित शिकायत सौंपेंगे।
किसलय धृतलहरे का नाम पहले भी आरटीई से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों में सामने आ चुका है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब पूर्व में शिक्षा विभाग के एक अधिकारी पर कलेक्टर सख्त कार्रवाई कर चुके हैं, तो क्या इस मामले में भी निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई होगी?












