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बिरगहनी में कोल माफियाओं का विस्तार या विकास? जनसुनवाई से पहले प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे सवाल

220 एमटीपीए कोल वाशरी विस्तार और 25 मेगावाट पावर प्लांट का प्रस्ताव, ग्रामीण बोले— खेत बंजर हुए, लोग बीमार पड़े, लेकिन जिम्मेदारों ने साध रखी है चुप्पी

बिरगहनी में कोल माफियाओं का विस्तार या विकास? जनसुनवाई से पहले प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे सवाल

220 एमटीपीए कोल वाशरी विस्तार और 25 मेगावाट पावर प्लांट का प्रस्ताव, ग्रामीण बोले— खेत बंजर हुए, लोग बीमार पड़े, लेकिन जिम्मेदारों ने साध रखी है चुप्प

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जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा क्षेत्र अंतर्गत बिरगहनी (ब) में प्रस्तावित कोल वाशरी विस्तार और 25 मेगावाट विद्युत संयंत्र को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। हिंद कोल वाशरी अपनी वर्तमान 96 एमटीपीए क्षमता को बढ़ाकर 220 एमटीपीए करने की तैयारी में है, जिस पर 3 जून को जनसुनवाई होनी है। लेकिन जनसुनवाई से पहले ही क्षेत्र में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में वर्षों से संचालित कोल वाशरियों ने पर्यावरण, खेती और लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। कोयले की धूल से खेतों की उर्वरता प्रभावित हुई है, फसल उत्पादन घटा है और कई किसानों की जमीन बंजर होने की कगार पर पहुंच गई है। वहीं दमा, खांसी और श्वास संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।ग्रामीण यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जब पहले से संचालित उद्योग अपने सामाजिक और पर्यावरणीय दायित्वों को पूरी तरह नहीं निभा पाए, तो फिर नई विस्तार योजना को मंजूरी देने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है? रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय विकास के नाम पर किए गए वादों का धरातल पर कितना पालन हुआ, यह भी बड़ा सवाल बना हुआ है।सबसे ज्यादा नाराजगी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकायतों और विरोध के बावजूद न तो प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण हुआ और न ही प्रभावित गांवों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला गया। ऐसे में लोगों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि उद्योग प्रबंधन को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।अब निगाहें कल होने वाली जनसुनवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि यह जनसुनवाई वास्तव में जनता की राय जानने का मंच बनती है या फिर औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर कोल वाशरी विस्तार और 25 मेगावाट पावर प्लांट के लिए रास्ता साफ कर दिया जाता है। बिरगहनी और आसपास के गांवों के लिए यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।

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