एनएच-49 किनारे करोड़ों की सरकारी जमीन पर विवाद, रिकॉर्ड दुरुस्ती पर उठे सवाल कलेक्टर से जांच की मांग
शासकीय घास भूमि को निजी नाम दर्ज करने का आरोप, तहसीलदार बोले- 1968-69 की नीलामी के दस्तावेजों के आधार पर हुई नियमानुसार कार्रवाई

जांजगीर-चांपा : जिला मुख्यालय से लगे ग्राम बनारी में एनएच-49 किनारे स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को लेकर नया विवाद सामने आया है। अधिवक्ता रामखिलावन राठौर ने कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि वर्षों से शासकीय घास भूमि के रूप में दर्ज खसरा नंबर 2230/2 (रकबा 2 एकड़) का रिकॉर्ड नियमों के विपरीत निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचा है। शिकायत में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार उक्त भूमि वर्ष 1929-30 के बंदोबस्त से लेकर बाद के राजस्व अभिलेखों में शासकीय घास भूमि के रूप में दर्ज थी। आरोप है कि वर्ष 2026 में रिकॉर्ड दुरुस्ती के बाद भूमि बोधराम पिता देवप्रसाद एवं अन्य तथा मनोज पिता ताराचंद एवं अन्य के नाम दर्ज कर दी गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि रिकॉर्ड दुरुस्ती के कुछ समय बाद ही भूमि की पावर ऑफ अटॉर्नी जमीन कारोबारियों को सौंप दी गई, जिससे पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायतकर्ता ने हल्का पटवारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि संबंधित पटवारी की पदस्थापना के बाद वर्षों से लंबित मामला अचानक सक्रिय हुआ। साथ ही आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने और प्रथम अपील के बाद भी दस्तावेज नहीं मिलने को भी उन्होंने संदेहास्पद बताया है।


जांजगीर तहसीलदार राजकुमार मरावी ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि रिकॉर्ड दुरुस्ती का आवेदन वर्ष 2023 में प्राप्त हुआ था। जांच के दौरान वर्ष 1968-69 की नीलामी से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिनके आधार पर संबंधित परिवार का अधिकार पाया गया और नियमानुसार रिकॉर्ड दुरुस्त किया गया। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता के व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि एनएच-49 किनारे जमीनों की कीमत बढ़ने के साथ जमीन कारोबारियों की सक्रियता भी बढ़ी है और विवादित रिकॉर्ड वाली जमीनों में उनकी रुचि अधिक रहती है। हालांकि, इस मामले में किसी कारोबारी की भूमिका की पुष्टि अभी नहीं हुई है और पूरे प्रकरण की सच्चाई प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगी।












