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मजदूर की मौत के 15 दिन बाद भी FIR नहीं, नवागढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।

मजदूर की मौत के 15 दिन बाद भी FIR नहीं, नवागढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

अमोदा में यादव परिवार के निर्माणाधीन मकान में 11 केवी लाइन बनी काल, पीड़ित परिवार को झांसा देकर मामला रफा-दफा करने की चर्चा तेज

जांजगीर-चांपा। नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम अमोदा में 11 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मजदूर संतोष कुमार कर्ष की हुई दर्दनाक मौत के 15 दिन से अधिक समय बीत चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। वहीं क्षेत्र में इस बात की भी चर्चा तेज है कि पीड़ित परिवार को विभिन्न प्रकार के आश्वासन देकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार हरदी निवासी 40 वर्षीय संतोष कुमार कर्ष ग्राम अमोदा में यादव परिवार के निर्माणाधीन मकान में मजदूरी का कार्य कर रहा था। निर्माण स्थल के ऊपर से 11 केवी हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी। काम के दौरान वह हाईवोल्टेज तार की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे ने एक गरीब परिवार का सहारा छीन लिया, लेकिन घटना के 15 दिन बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि हादसा पूरी तरह लापरवाही का परिणाम है। यदि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता और बिजली लाइन को लेकर आवश्यक सावधानियां बरती गई होतीं तो मजदूर की जान बच सकती थी। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की, लेकिन जांच की रफ्तार इतनी धीमी है कि अब तक एफआईआर तक दर्ज नहीं हो सकी है।

 

विद्युत विभाग ने भी मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए थाना को पत्र भेजा है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा अपराध दर्ज नहीं किए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी सामान्य व्यक्ति के खिलाफ ऐसा मामला होता तो अब तक कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी होती।

इस बीच गांव और क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि पीड़ित परिवार को समझौते और आश्वासनों का झांसा देकर मामले को शांत करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही देरी ने लोगों के संदेह को और बढ़ा दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के कारण मामला दबाने की कोशिश की जा रही है।

मृतक संतोष कुमार कर्ष अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसकी मौत के बाद परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। परिजनों का कहना है कि उन्हें न्याय की उम्मीद थी, लेकिन अब तक केवल जांच और आश्वासन ही मिले हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी

नवागढ़ थाना प्रभारी मणिकांत पांडेय ने बताया कि एक पक्ष का बयान लिया गया है। दोनों पक्षों के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं जांच अधिकारी प्रेमलाल दिवाकर ने कहा कि उन्हें हाल ही में प्रकरण की डायरी प्राप्त हुई है और मामले की जांच जारी है।

सबसे बड़ा सवाल

एक गरीब मजदूर की मौत के 15 दिन बाद भी यदि एफआईआर दर्ज नहीं हो पाती है तो आखिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? क्या कानून का डंडा केवल कमजोर लोगों पर ही चलता है? क्या प्रभावशाली लोगों के सामने पुलिस की कार्रवाई धीमी पड़ जाती है।

अमोदा हादसे में मजदूर संतोष कुमार कर्ष की मौत को 15 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि जांच में अनावश्यक विलंब या लापरवाही पाई जाती है तो क्या संबंधित जांच अधिकारी और थाना प्रभारी की जवाबदेही भी तय होगी?

हाल ही में पंतोरा चौकी के प्रधान आरक्षक रमेश त्रिपाठी के मामले में जिस तरह विभागीय कार्रवाई की गई थी, उसी तरह अब लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या अमोदा हादसे में जांच और कार्रवाई में हुई देरी को लेकर संबंधित जांच अधिकारी एवं थाना प्रभारी की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी?

ग्रामीणों और मृतक परिवार का कहना है कि जब एक गरीब मजदूर की मौत के मामले में भी समय पर अपराध दर्ज नहीं हो पा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना भी उतना ही जरूरी है। लोगों की नजर अब जिला पुलिस प्रशासन पर टिकी है। क्षेत्र में चर्चा है कि यदि जांच में लापरवाही या कर्तव्य निर्वहन में कमी सामने आती है तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी, या फिर पूरा मामला केवल जांच और पत्राचार तक सीमित रह जाएगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मृतक परिवार को न्याय कब मिलेगा और क्या मामले में देरी के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय की जाएगी?

अब पूरे जिले की निगाहें पुलिस अधीक्षक पर टिकी हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी या फिर जांच और आश्वासनों के बीच एक गरीब मजदूर की मौत का मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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