जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार के सबूत मिटाने आग लगाने की साजिश? विधानसभा में गूंजा मामला, निष्पक्ष जांच पर उठे सवाल।
विधायक ब्यास कश्यप ने विधानसभा में उठाया 8.80 लाख की अनियमितता, जीवनदीप मद और आगजनी का मुद्दा मंत्री ने 5 सदस्यीय जांच टीम का दिया भरोसा।

जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार के सबूत मिटाने आग लगाने की साजिश? विधानसभा में गूंजा मामला, निष्पक्ष जांच पर उठे सवाल।
विधायक ब्यास कश्यप ने विधानसभा में उठाया 8.80 लाख की अनियमितता, जीवनदीप मद और आगजनी का मुद्दा मंत्री ने 5 सदस्यीय जांच टीम का दिया भरोसा।
जांजगीर-चांपा जिला अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितता और सिविल सर्जन कार्यालय में हुई आगजनी का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है। विधायक ब्यास कश्यप ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से आरोप लगाया कि मितानिनों और स्वीपरों की प्रोत्साहन राशि में 8 लाख 80 हजार रुपये की अनियमितता हुई और राशि दो कर्मचारियों के निजी खातों में ट्रांसफर की गई। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं सिविल सर्जन कार्यालय में हुई आगजनी भ्रष्टाचार के सबूत मिटाने की साजिश तो नहीं थी।
हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में कहा कि ऑनलाइन वेंडर वैलिडेशन की तकनीकी समस्या और वित्तीय वर्ष की अंतिम तिथि के कारण राशि अस्थायी रूप से कर्मचारियों के खातों में डाली गई थी, जिसे बाद में जीवनदीप समिति के खाते में जमा करा दिया गया। मंत्री ने आगजनी में किसी दस्तावेज के नष्ट होने से इनकार करते हुए अस्पताल को “भ्रष्टाचार का गढ़” बताए जाने के आरोप को भी खारिज किया।
विधायक ब्यास कश्यप ने मंत्री के जवाब पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि तकनीकी समस्या थी तो राशि विभागीय खाते में क्यों नहीं डाली गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई तथा जांच पूरी होने तक उन्हें हटाने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग का समर्थन किया।
सरकार ने मामले की जांच के लिए प्रदेश स्तर की 5 सदस्यीय जांच समिति गठित करने और जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और यदि अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या यह मामला भी केवल जांच तक सीमित रह जाएगा?












