पहले बोड़सरा स्कूल का कथित विवाद, फिर डोंगाकोहरौद के प्रधान पाठक का वायरल वीडियो… अब भाठापाली स्कूल में अंधविश्वास का आरोप, आखिर सरकारी स्कूलों में क्या हो रहा है?

पहले बोड़सरा स्कूल का कथित विवाद, फिर डोंगाकोहरौद के प्रधान पाठक का वायरल वीडियो… अब भाठापाली स्कूल में अंधविश्वास का आरोप, आखिर सरकारी स्कूलों में क्या हो रहा है?
जांजगीर-चांपा। एक महीने के भीतर जिले के सरकारी स्कूलों से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।सबसे पहले बोड़सरा के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक-शिक्षिका के कथित अनुचित व्यवहार का मामला चर्चा में आया। इसके बाद शासकीय प्राथमिक शाला तेलीपारा, डोंगाकोहरौद के प्रधान पाठक भुवनेश्वर कौशिक का कथित आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुआ। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर के निर्देश पर जांच कराई गई और जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने उन्हें निलंबित कर दिया।अब तीसरा मामला बलौदा विकासखंड के ग्राम पंचायत डोंगरी-काठापाली स्थित शासकीय प्राथमिक शाला काठापाली (भाठापाली) से सामने आया है। यहां एक शिक्षिका पर आरोप है कि सोने की बाली खो जाने के बाद 30 से अधिक बच्चों के हाथों में नारियल, चावल और मौली रखवाकर उनसे शपथ दिलाई गई। शिकायत के अनुसार बच्चों से यह भी कहा गया कि यदि किसी को बाली मिली है और वह वापस नहीं करेगा, तो उसके साथ अनहोनी हो सकती है। घटना के बाद कई बच्चे डर गए और घर पहुंचकर अपने परिजनों को पूरी बात बताई। इसके बाद ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। मामले की जांच बीईओ द्वारा की जा रही है और डीईओ ने जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है।लगातार सामने आए इन तीन मामलों ने अभिभावकों और समाज के बीच चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह है कि जिन स्कूलों में बच्चों को वैज्ञानिक सोच, नैतिक मूल्य और बेहतर शिक्षा देने की जिम्मेदारी है, वहां बार-बार ऐसे विवाद क्यों सामने आ रहे हैं? अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।












