सावन की फुहारों में खिला संस्कृति और संस्कारों का रंग, ‘सखी री सावन मन भायो’ में गूंजा मातृशक्ति का संदेश

सखी री सावन मन भायो: संस्कृति, संस्कार और मातृशक्ति का मनोहारी संगम
चांपा,सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चांपा में बालिका शिक्षा विभाग एवं कन्या भारती के तत्वावधान में ‘सखी री सावन मन भायो’ कार्यक्रम का आयोजन हर्षोल्लास और आत्मीय वातावरण में किया गया। सावन की हरियाली, भारतीय लोकपरंपरा, पारिवारिक संस्कार और मातृशक्ति की सहभागिता से विद्यालय परिसर उत्सवमय नजर आया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती इंजीनियर मंजूषा पाटले, समाजसेविका, भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान की सदस्य एवं अधिवक्ता रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला संयोजिका, महिला प्रकोष्ठ साहू संघ श्रीमती हेमलता साहू ने की। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विद्यालय की वरिष्ठ दीदी श्रीमती मिनी देवांगन ने अतिथियों का तिलक एवं श्रीफल से स्वागत किया।
सावन भारतीय संस्कृति और पारिवारिक आत्मीयता का प्रतीक
मुख्य अतिथि श्रीमती इंजीनियर मंजूषा पाटले ने कहा कि सावन भारतीय संस्कृति, परंपरा, श्रद्धा, उल्लास और पारिवारिक आत्मीयता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि नारी परिवार की आधारशिला है। उसके स्नेह, संस्कार और सकारात्मक सोच से परिवार में प्रेम, अनुशासन और एकता का वातावरण निर्मित होता है। उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ सामूहिक भोज और पारिवारिक संवाद की परंपरा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
मंजूषा पाटले ने मां-बेटी के रिश्ते को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि मां बेटी की प्रथम शिक्षिका और मार्गदर्शक होती है। मां का विश्वास, स्नेह, संस्कार और प्रोत्साहन बेटी के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बालिकाओं को शिक्षा के साथ आत्मविश्वास, विवेक, संस्कार और आत्मनिर्भरता देना परिवार का महत्वपूर्ण दायित्व है।
मां-बेटी का संवाद सशक्त भविष्य की आधारशिला
कार्यक्रम की अध्यक्ष श्रीमती हेमलता साहू ने कहा कि सावन केवल उत्सव और उमंग का महीना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और पारिवारिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर है। ऐसे आयोजन मातृशक्ति को एक मंच पर लाकर आपसी स्नेह, संवाद और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की बदलती परिस्थितियों में मां की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। बेटियों को शिक्षा, संस्कार, सम्मान, आत्मविश्वास और समान अवसर देना आवश्यक है। मां-बेटी के बीच खुला और आत्मीय संवाद बालिका के सुरक्षित एवं सशक्त भविष्य की आधारशिला है।
बालिका शिक्षा और संस्कारों पर महत्वपूर्ण जानकारी
विद्यालय की दीदी श्रीमती सुशीला पटेल ने शिशु वाटिका के बारह आयामों, बालिका शिक्षा की दस परिषदों, स्वर्ण प्राशन के महत्व, माता के दायित्व और मोबाइल के दुष्परिणामों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के समग्र विकास के लिए संस्कारयुक्त वातावरण, उचित मार्गदर्शन और परिवार में सकारात्मक संवाद की आवश्यकता पर बल दिया।
सावन के रंग में रंगी मातृशक्ति
कार्यक्रम में माताओं के लिए विभिन्न मनोरंजक खेल एवं नृत्य आयोजित किए गए, जिसमें माताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सावन के गीत, नृत्य और उमंग से विद्यालय परिसर का वातावरण आनंदमय हो उठा। आयोजन ने मातृशक्ति को आपसी आत्मीयता, संवाद और सांस्कृतिक जुड़ाव का सुंदर अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती शिवानी तिवारी ने किया तथा आभार प्रदर्शन श्रीमती ललिता तिवारी द्वारा किया गया। कार्यक्रम को विद्यालय के प्राचार्य श्री अश्वनी कुमार कश्यप एवं प्रधानाचार्य श्री कृष्ण कुमार पांडे का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। विद्यालय की समस्त दीदियों एवं बहनों के सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

‘सखी री सावन मन भायो’ कार्यक्रम सावन की हरियाली और उल्लास के साथ भारतीय संस्कृति, पारिवारिक संस्कार, मातृशक्ति की भूमिका और बालिका शिक्षा के संदेश को एक सूत्र में पिरोने वाला सार्थक आयोजन रहा। कार्यक्रम ने उपस्थित माताओं एवं बालिकाओं के मन में संस्कार, आत्मीयता, संस्कृति और सशक्तिकरण की सुंदर भावना जागृत की।











