भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, चांपा में प्रदर्शनी, फैशन शो एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का हुआ सम्मान,सरकार ने योजना को रोजगार उन्मूलन बना युवाओ और बेरोजगार के बड़ा अवसर:श्रीमती मंजुषा पाटले

भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, चांपा में प्रदर्शनी, फैशन शो एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
जांजगीर-चांपा, 7 अगस्त राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, चांपा में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत हाथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी, फैशन शो, निबंध प्रतियोगिता, रंगोली एवं चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। वहीं संस्थान के प्रथम, द्वितीय एवं अंतिम वर्ष में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने सभी शिल्पकारों, बुनकरों एवं विद्यार्थियों को राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस देश के बुनकरों और हस्तशिल्प परंपरा को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस का संबंध स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन से है, जिसने आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग का संदेश दिया। कलेक्टर ने कहा कि चांपा का कोसा पूरे विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे कम से कम एक हाथकरघा अथवा कोसा उत्पाद का उपयोग अवश्य करें, ताकि स्थानीय बुनकरों को प्रोत्साहन मिले और “वोकल फॉर लोकल” अभियान को मजबूती मिल सके।कलेक्टर महोबे ने कहा कि चांपा के बुनकरों के अथक परिश्रम और उत्कृष्ट कौशल के कारण यहां के कोसा वस्त्रों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है। बदलते बाजार और उपभोक्ताओं की मांग के अनुरूप पारंपरिक शिल्प के साथ आधुनिक तकनीक का समन्वय आवश्यक है। इसी दिशा में भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, चांपा को पुनर्जीवित एवं सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आगामी तीन वर्षों में 900 से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।इस अवसर पर भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान चांपा की सदस्य एवं अनुश्रवण समिति की सदस्य श्रीमती इंजीनियर मंजुषा पाटले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के “वोकल फॉर लोकल”, “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” जैसे अभियानों ने देश के बुनकरों और शिल्पकारों को नई पहचान दिलाई है, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं को कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
श्रीमती मंजुषा पाटले ने कहा कि कम लागत में कौशल आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर युवाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित किया जा रहा है। इससे स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिलने के साथ-साथ स्वदेशी उत्पादों को भी बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि चांपा का कोसा केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान है। इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए सभी नागरिकों को स्थानीय हाथकरघा उत्पादों के उपयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की योजनाओं से आने वाले समय में हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा और हाथकरघा उद्योग नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

कार्यक्रम में जनपद उपाध्यक्ष बलौदा शिशुपाल सिंह, सरपंच छोटू कुर्रे संस्थान के शैक्षणिक स्टाफ बिहारी लाल पटेल, श्रीमती श्रद्धा द्विवेदी, श्रीमती जयंती देवांगन, श्रीमती एकता सोनी सहित संस्थान के अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय बुनकर, शिल्पकार एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया तथा संस्थान परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर सभी ने भारतीय हस्तकरघा उद्योग को सशक्त बनाने और स्थानीय उत्पादों को अपनाने का संकल्प लिया।













