अफसर बदले तो खुला सट्टे का खेल, 30 लाख के लेनदेन ने खोले पुलिसिंग पर सवाल।

अफसर बदले तो खुला सट्टे का खेल, 30 लाख के लेनदेन ने खोले पुलिसिंग पर सवाल
जांजगीर-चांपा। बीडीजी ऑनलाइन सट्टा ऐप के जरिए चल रहे बड़े नेटवर्क पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य एडमिन समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक जांच में 30 लाख रुपए से अधिक के लेनदेन का खुलासा हुआ है। मास्टर एडमिन से लेकर आईडी होल्डर्स तक फैले नेटवर्क से मोबाइल, व्हाट्सऐप चैट, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में हेमलाल यादव उर्फ सोनू (47), न्यू चंदनियापारा लिंक रोड जांजगीर, शैलेंद्र कुमार शर्मा उर्फ शैलू (45), शंकर विहार कॉलोनी लिंक रोड जांजगीर, महेश प्रसाद राठौर उर्फ मुकेश (47), न्यू चंदनियापारा वार्ड क्रमांक 7 जांजगीर, राकेश कुमार राठौर उर्फ पप्पू (45), हरियाली हेरिटेज के बगल अकलतरा रोड जांजगीर, दुर्गेश कुमार राठौर उर्फ मनु (45), पुराना चंदनियापारा लिंक रोड जांजगीर और हीरालाल यादव (47), न्यू चंदनियापारा लिंक रोड जांजगीर शामिल हैं।
पुलिस ने शैलेंद्र कुमार शर्मा उर्फ शैलू को मुख्य एडमिन बताया है। पुलिस के अनुसार वह कमीशन के आधार पर सट्टे की लिंक और आईडी आगे उपलब्ध कराता था। डिजिटल साक्ष्यों और लेनदेन की पड़ताल के आधार पर पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने में जुटी है।
अफसर बदले तो क्यों खुला इतना बड़ा नेटवर्क?
कार्रवाई के बाद पुलिसिंग व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि मोबाइल और व्हाट्सऐप के जरिए संचालित होने वाला यह नेटवर्क यदि लंबे समय से सक्रिय था और इसमें 30 लाख रुपए से अधिक का लेनदेन हो चुका था, तो इसकी भनक पहले क्यों नहीं लगी?
खास बात यह है कि पुलिस विभाग में अफसरों और क्राइम ब्रांच की जिम्मेदारियों में बदलाव के बाद यह कार्रवाई सामने आई। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या नई टीम ने आते ही पुराने मामलों और संदिग्ध नेटवर्क की निगरानी को नए सिरे से शुरू किया?
हालांकि बिना ठोस साक्ष्य किसी पुलिस अधिकारी या जवान पर मिलीभगत का आरोप लगाना उचित नहीं है। लेकिन संवेदनशील साइबर और अपराध शाखा में लंबे समय से पदस्थ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और सूचना तंत्र की समीक्षा जरूर जरूरी हो जाती है।
अब पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ छह आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। जांच को आगे बढ़ाकर यह पता लगाना होगा कि इस नेटवर्क का मास्टर नेटवर्क कौन चला रहा था, पैसा कहां जा रहा था, कितने आईडी होल्डर्स जुड़े थे और क्या इसकी कड़ियां जिले से बाहर तक फैली हैं।
सवाल सिर्फ सट्टा पकड़ने का नहीं है, सवाल उस पुलिसिंग सिस्टम की जवाबदेही का भी है जिसकी निगरानी के बीच 30 लाख से ज्यादा का ऑनलाइन कारोबार चलता रहा। अब देखना होगा कि कार्रवाई सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी तक रुकती है या फिर पूरे नेटवर्क और उसकी निगरानी व्यवस्था की भी सर्जरी होती है।












