Newsजांजगीर चांपा

आम के लिए सख्ती, खास के लिए खामोशी? अनिरुद्धाचार्य के काफिले से लेकर वायरल वीडियो तक—जांजगीर-चांपा पुलिस की कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल।

किसके लिए कानून सख्त, किसके लिए नरम? जांजगीर-चांपा पुलिस के रवैये पर बड़े सवाल।

 

काफिले में यातायात नियमों की कथित अनदेखी पर खामोशी, छोटे मामलों में तत्काल कार्रवाई—क्या जिले में कानून का पैमाना अलग-अलग है?

जांजगीर-चांपा। कानून की नजर में हर नागरिक बराबर होता है, लेकिन जांजगीर-चांपा पुलिस की कार्रवाई को लेकर सामने आ रहे अलग-अलग मामलों ने अब इसी मूल सवाल को कटघरे में खड़ा कर दिया है—क्या जिले में कानून सबके लिए एक समान है, या फिर हैसियत और भीड़ देखकर कार्रवाई का पैमाना बदल जाता है?

कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य के काफिले से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में सुरक्षा गार्ड और कैमरा टीम की गतिविधियों को लेकर यातायात नियमों की कथित अनदेखी और स्टंटबाजी के सवाल उठ रहे हैं। लाखों की भीड़ वाले कार्यक्रम में जब खुद पुलिस प्रशासन साइबर अपराध से बचने की अपील कर रहा था, तब सवाल यह है कि क्या उसी आयोजन से जुड़े काफिले में सुरक्षा और यातायात नियमों की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?दूसरी ओर कुछ दिन पहले ट्रैक्टर पर गरबा कार्यक्रम के प्रमोशन के लिए शूटिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस प्रशासन की कार्रवाई तेजी से सामने आई। आरोप है कि संबंधित युवती से सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाने का दबाव बनाया गया और बाद में वह थाने में चक्कर खाकर गिर गई। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।यही नहीं, तीजा-पोरा पर्व के दौरान स्थानीय लोक कलाकार सूरज श्रीवास से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर भी सोशल मीडिया पर विवाद हुआ। धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर लोगों के बीच सवाल उठे कि आखिर कार्रवाई का मापदंड क्या है?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—एक मामले में पुलिस की सख्ती और दूसरे मामले में कथित चुप्पी क्यों?

अगर यातायात नियम तोड़ना अपराध है तो काफिला बड़ा हो या छोटा, नियम सब पर लागू होना चाहिए। अगर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई हो सकती है, तो फिर अन्य वायरल वीडियो पर पुलिस का रुख भी साफ होना चाहिए।

सवाल पुलिस की नीयत पर नहीं, व्यवस्था की समानता पर है।सवाल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, कानून के एक समान इस्तेमाल का है।

और सवाल यह भी है कि क्या आम आदमी के लिए अलग कानून और रसूखदारों के लिए अलग व्यवस्था?पुलिस प्रशासन को चाहिए कि सामने आए सभी वीडियो और आरोपों की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करे कि किन मामलों में क्या कार्रवाई की गई और किन मामलों में क्यों नहीं की गई। क्योंकि जब कानून की कार्रवाई में पारदर्शिता दिखाई नहीं देती, तब सवाल सिर्फ एक घटना पर नहीं उठता—पूरी कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता पर उठता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button