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जिला जेल में एचआईवी संक्रमित कई बंदियों के मामले के बीच स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।

जिला जेल में एचआईवी संक्रमित कई बंदियों के मामले के बीच स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जांजगीर-चांपा जिला जेल में कई बंदियों के एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। गंभीर मामला होने के बावजूद सीएमएचओ डॉ. अनिता श्रीवास्तव को इसकी जानकारी नहीं होने की बात सामने आने से विभागीय समन्वय और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

इसी बीच जिले में एक और चर्चा जोर पकड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों और क्षेत्र में चल रही चर्चाओं के अनुसार, सीएमएचओ कार्यालय से संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्णय चांपा स्थित एक निजी क्लीनिक से लिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह चर्चा पूरे जिले में बहस का विषय बनी हुई है।

लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि सरकारी कार्यालय का संचालन और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय वास्तव में किसी निजी क्लीनिक से लिए जा रहे हैं तो इसके पीछे क्या कारण हैं? जिला मुख्यालय स्थित सीएमएचओ कार्यालय की भूमिका क्या है? और सरकारी कामकाज के संचालन की निर्धारित व्यवस्था का पालन किस प्रकार किया जा रहा है?

जिला जेल में एचआईवी संक्रमित बंदियों के उपचार जैसे गंभीर विषय पर विभाग प्रमुख तक जानकारी नहीं पहुंचना और दूसरी ओर विभागीय संचालन को लेकर उठ रहे सवालों ने स्वास्थ्य प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

सीएमएचओ और जेल प्रशासन का पक्ष

जिला जेल में बंदियों के एचआईवी पॉजिटिव होने के मामले में जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिता श्रीवास्तव से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। वहीं जिला जेल के जेलर ने भी मामले की विस्तृत जानकारी होने से इनकार किया। दोनों अधिकारियों द्वारा जानकारी नहीं होने की बात कहे जाने के बाद गंभीर मामले की मॉनिटरिंग और विभागीय समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

अब जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण निर्णय कहां और किस प्रक्रिया के तहत लिए जा रहे हैं, ताकि जनता के बीच उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके और प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे।

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