जांजगीर चांपा

वेतनमान विवाद पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन; उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग।

जांजगीर-चांपा : छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के आह्वान पर मंगलवार को प्रदेशभर के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने शांतिपूर्ण रैली निकालकर जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वेतनमान निर्धारण से जुड़े पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और लंबित वेतनमान का लाभ तत्काल देने की मांग की गई।संघ का आरोप है कि राज्य स्वास्थ्य समिति की शासी निकाय द्वारा वेतनमान को लेकर लिए गए निर्णय, स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश और भारत सरकार की गाइडलाइन के बावजूद केंद्र सरकार को अलग प्रस्ताव भेजा गया। इसका खामियाजा प्रदेश के 3,700 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को भुगतना पड़ रहा है, जो अब तक संशोधित वेतनमान से वंचित हैं।संघ ने बताया कि आयुष्मान भारत-हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर ऑपरेशनल गाइडलाइंस के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को 25 हजार रुपये प्रतिमाह निश्चित मानदेय के साथ कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है। राज्य स्वास्थ्य समिति की शासी निकाय ने भी वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना में वेतनमान पुनर्निर्धारण के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बावजूद केंद्र सरकार को पुराने वेतनमान का प्रस्ताव भेजे जाने से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।संघ का दावा है कि सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेज, शासी निकाय की बैठक के कार्यवृत्त और भारत सरकार की रिकॉर्ड ऑफ प्रोसीडिंग्स (ROP) से स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार ने राज्य से भेजे गए प्रस्ताव को ही मंजूरी दी थी। ऐसे में संशोधित वेतनमान लागू नहीं होने के पीछे राज्य स्तर पर अनुमोदित प्रस्ताव नहीं भेजे जाने की आशंका जताई गई है।ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि पूरे मामले की मुख्य सचिव स्तर या किसी स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, यदि जांच में लापरवाही या शासन के निर्णयों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक और वैधानिक कार्रवाई की जाए।संघ ने यह भी मांग की है कि अनुपूरक PIP के माध्यम से शासी निकाय द्वारा अनुमोदित वेतनमान प्रस्ताव को तत्काल भारत सरकार को दोबारा भेजा जाए और सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को संशोधित वेतनमान के साथ बकाया अंतर राशि एवं अन्य देय लाभ दिए जाएं।संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शासन के विधिवत निर्णयों के सम्मान, प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और हजारों सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री इस गंभीर मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए न्यायोचित निर्णय लेंगे। वहीं, जिला अध्यक्ष बुद्धेश्वर लहरे ने भी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई।

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