छत्तीसगढ़ की अस्मिता और आस्था से खिलवाड़ पर सख्त कार्रवाई की मांग विकलांग कुत्ते को नंदी बैल बताकर वीडियो वायरल करने का आरोप, कलाकार सूरज श्रीवास के खिलाफ कार्रवाई की मांग प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल।

छत्तीसगढ़ की अस्मिता और आस्था से खिलवाड़ पर सख्त कार्रवाई की मांग
विकलांग कुत्ते को नंदी बैल बताकर वीडियो वायरल करने का आरोप, कलाकार सूरज श्रीवास के खिलाफ कार्रवाई की मांग प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ की संस्कृति और अस्मिता से जुड़े पोरा तिहार के बीच सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर शहर में आक्रोश देखने को मिल रहा है। आरोप है कि कलाकार सूरज श्रीवास द्वारा एक विकलांग कुत्ते को नंदी बैल बताकर वीडियो बनाया गया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। लोगों का कहना है कि मनोरंजन और लोकप्रियता हासिल करने के लिए धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों का इस तरह इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मामले को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि सूरज श्रीवास लंबे समय से विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुतियां देते रहे हैं। ऐसे में प्रशासनिक कार्यक्रमों से जुड़े कलाकार द्वारा कथित तौर पर आस्था को ठेस पहुंचाने वाला वीडियो सामने आने के बाद अब तक संज्ञान क्यों नहीं लिया गया, यह बड़ा सवाल है।
सबसे बड़ा सवाल उन संगठनों से भी है, जो अक्सर हिंदुत्व और धार्मिक आस्था की रक्षा की बात करते हैं। सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बावजूद ऐसे संगठन अब तक कार्रवाई की मांग को लेकर सामने क्यों नहीं आए? क्या धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई के अलग-अलग पैमाने तय हैं?
शहरवासियों का कहना है कि यदि वीडियो वास्तव में धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाला है तो केवल वीडियो हटाने या बाद में माफी मांग लेने से मामला खत्म नहीं होना चाहिए। प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह तय करना चाहिए कि वीडियो किस उद्देश्य से बनाया गया, किस तरह वायरल हुआ और क्या इससे किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
अब शहर में प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग करने की तैयारी की जा रही है। लोगों की मांग है कि भविष्य में लोकप्रियता या सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए कोई भी व्यक्ति छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था का मजाक बनाने की हिमाकत न करे। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई हो, ताकि आस्था और संस्कृति के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए स्पष्ट संदेश जाए कि मनोरंजन के नाम पर धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।











