जांजगीर चांपा

रीलबाजी पर सिर्फ चालानी कार्रवाई, तो ग्रैंड गरबा की फूहड़ता पर लगाम कौन लगाएगा?

स्टंटबाजी और रीलबाजी पर कार्रवाई के अलग-अलग पैमाने से उठे सवाल, 15 अगस्त से शुरू हुआ माफी मांगकर छोड़ने का सिलसिला अब चालान तक पहुंचा ट्रैक्टर जप्त नहीं होने और मालिक की भूमिका पर भी सवाल।

रीलबाजी पर सिर्फ चालानी कार्रवाई, तो ग्रैंड गरबा की फूहड़ता पर लगाम कौन लगाएगा?

स्टंटबाजी और रीलबाजी पर कार्रवाई के अलग-अलग पैमाने से उठे सवाल, 15 अगस्त से शुरू हुआ माफी मांगकर छोड़ने का सिलसिला अब चालान तक पहुंचा ट्रैक्टर जप्त नहीं होने और मालिक की भूमिका पर भी सवाल

जांजगीर-चांपा में रीलबाजी और स्टंटबाजी को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। 15 अगस्त को हाईस्कूल मैदान में एक नाबालिग युवती द्वारा कमर में चाकू लगाकर रील बनाए जाने का मामला सामने आया था। वीडियो वायरल होने के बाद माफी मंगवाकर उसे छोड़ दिया गया। इसके बाद रीलबाजी के दूसरे मामलों में भी सख्त कार्रवाई के बजाय समझाइश और चालानी कार्रवाई तक मामला सीमित रहने से सवाल उठने लगे हैं कि आखिर रीलबाजों के लिए कार्रवाई का पैमाना क्या तय है?

कुछ समय पहले खोखरा स्टेडियम में ट्रैक पर वाहन चलाकर रील बनाने वाले दिव्यांग युवक के मामले में पुलिस ने जेल भेजने तक की कार्रवाई की थी। वहीं कार नीलामी कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के दौरान रीलबाजी को लेकर भी सख्त कार्रवाई सामने आई थी। अब ट्रैक्टर पर रील बनाने के मामले में सिर्फ चालानी कार्रवाई कर छोड़ दिया गया। इससे सवाल उठता है कि क्या नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई गलती की गंभीरता के बजाय परिस्थितियों और दबाव के हिसाब से तय हो रही है?

इस मामले में एक और बड़ा सवाल ट्रैक्टर की जप्ती नहीं होने को लेकर है। आखिर जिस ट्रैक्टर का इस्तेमाल रील बनाने में किया गया, वह किसका है? ट्रैक्टर मालिक कौन है? क्या पुलिस ने वाहन के दस्तावेज और मालिक की भूमिका की जांच की? अगर सार्वजनिक स्थल पर खतरनाक तरीके से रील बनाई गई थी, तो फिर ट्रैक्टर को जप्त क्यों नहीं किया गया? क्या वाहन मालिक के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है? इन सवालों का जवाब भी पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए।

इसी बीच आने वाले दिनों में ग्रैंड गरबा आयोजन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के नाम पर अगर पारंपरिक गरबा और देशी जागरण की जगह फूहड़ नृत्य और अश्लीलता परोसने की तैयारी है, तो प्रशासन और पुलिस पहले से इस पर लगाम लगाने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं? सार्वजनिक आयोजनों में मनोरंजन के नाम पर सामाजिक मर्यादा की सीमा आखिर कौन तय करेगा?

बताया जा रहा है कि वायरल रील के मामले में ग्रैंड गरबा की ऑर्गनाइजिंग टीम कार्रवाई को लेकर थाना पहुंची और बाद में एसपी कार्यालय तक भी पहुंचकर दबाव बनाने की कोशिश की गई। इसके बाद संबंधित रीलबाज पर सिर्फ चालानी कार्रवाई कर मामला खत्म कर दिया गया। यदि यह सही है तो सवाल यह भी है कि क्या बड़े आयोजन से जुड़े लोगों के दबाव के बाद कार्रवाई का स्वरूप बदल जाता है?

एक तरफ नाबालिग से चाकू वाली रील के मामले में माफी मांगकर छोड़ने की कार्रवाई, दूसरी तरफ कुछ मामलों में जेल तक की कार्रवाई और अब ट्रैक्टर रील मामले में सिर्फ चालान—इन अलग-अलग उदाहरणों ने पुलिस की कार्रवाई के पैमाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर वाहन का इस्तेमाल नियम तोड़ने में हुआ तो उसकी जप्ती क्यों नहीं हुई और ट्रैक्टर मालिक की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई?

माफी मांगकर छोड़ने से लेकर चालान काटकर छोड़ने तक अगर यही सिलसिला चलता रहा, तो रीलबाजों में कानून का डर कैसे पैदा होगा? आने वाले दिनों में लोगों के बीच यह संदेश जाना स्वाभाविक है कि नियम तोड़कर रील बनाओ, वीडियो वायरल होने दो और कार्रवाई हुई भी तो सिर्फ माफी या चालान देकर मामला खत्म हो जाएगा।

अब बड़ा सवाल ग्रैंड गरबा को लेकर है—क्या पुलिस और प्रशासन आयोजन से पहले ही स्पष्ट नियम तय करेगा? क्या अश्लीलता और फूहड़ता के नाम पर किसी भी तरह की प्रस्तुति पर निगरानी होगी? और क्या रीलबाजी, स्टंटबाजी तथा सार्वजनिक स्थलों पर खतरनाक हरकत करने वालों के लिए समान कार्रवाई का पैमाना लागू होगा?सवाल सिर्फ एक रीलबाज पर कार्रवाई का नहीं है। सवाल यह भी है कि ट्रैक्टर मालिक कौन है, वाहन जप्त क्यों नहीं हुआ, कार्रवाई सिर्फ चालान तक क्यों सीमित रही और क्या बड़े आयोजन से जुड़े दबाव के सामने कार्रवाई का पैमाना बदल जाता है?

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