जांजगीर चांपा

मंत्री और जिला अध्यक्ष का खुलेआम स्टंट बाजी सेवा यात्रा में यातायात नियमों की अनदेखी पर सवाल,आम राहगीरों पर सख्ती और रसूखदारों पर नरमी क्यों?

 

मंत्री और जिला अध्यक्ष का खुलेआम स्टंट बाजी सेवा यात्रा में यातायात नियमों की अनदेखी पर सवाल,आम राहगीरों पर सख्ती और रसूखदारों पर नरमी क्यों?

 

जांजगीर-चांपा। शहर में निकली सेवा यात्रा के दौरान मंत्री खुशवंत साहेब और जिला भाजपा अध्यक्ष अंबेश जांगड़े समेत अन्य राजनीतिक पदाधिकारियों की तस्वीरें सामने आने के बाद यातायात व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। तस्वीरों में यदि बिना हेलमेट या यातायात नियमों की अनदेखी दिखाई दे रही है, तो सवाल यह है कि क्या नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से सुनिश्चित किया जा रहा है?सड़क पर आम राहगीर बिना हेलमेट दिखाई दे तो तत्काल रोक-टोक, चालान और कानून का पाठ पढ़ाया जाता है, लेकिन राजनीतिक पद और रसूख रखने वालों के मामले में भी क्या यातायात विभाग वही कार्रवाई करेगा? सवाल व्यक्ति विशेष से ज्यादा व्यवस्था की समानता का है।अस्पताल जाने वाले मरीजों के परिजन, सरकारी इमरजेंसी ड्यूटी पर जाने वाले कर्मचारी और बुजुर्ग दंपति जैसे आम नागरिकों को यातायात जांच के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुलिस की सख्ती और व्यवहार को लेकर नागरिकों की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। यदि किसी जवान पर बदसलूकी, चाबी छीनने या धमकाने जैसे आरोप लगाए जाते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वर्दी कानून लागू करने का अधिकार देती है, लेकिन नागरिक के सम्मान से समझौता करने का अधिकार नहीं।वहीं दूसरी ओर, जब सार्वजनिक कार्यक्रम या सेवा यात्रा के दौरान जिम्मेदार राजनीतिक पदाधिकारियों की तस्वीरों में यातायात नियमों के पालन को लेकर सवाल दिखाई दें, तो पुलिस और यातायात विभाग से भी जवाब की अपेक्षा स्वाभाविक है।व्यंग्यात्मक सवाल यही है—“क्या गजब की सेवा यात्रा है साहब… जनता को कानून का पाठ पढ़ाने निकले हैं, तो क्या पहले खुद कानून का पालन करना जरूरी नहीं?”अगर किसी आम नागरिक को हेलमेट या किसी अन्य यातायात नियम के उल्लंघन पर रोका और दंडित किया जाता है, तो जनता यह सवाल पूछने का अधिकार रखती है कि सार्वजनिक रूप से दिखाई दे रहे नियम उल्लंघन पर भी क्या उसी तरह कार्रवाई होगी?यातायात नियम किसी व्यक्ति को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि सड़क पर हर व्यक्ति की सुरक्षा के लिए हैं। इसलिए कार्रवाई भी पद, पार्टी या पहचान देखकर नहीं, नियम देखकर होनी चाहिए।मंत्री खुशवंत साहेब और जिला भाजपा अध्यक्ष अंबेश जांगड़े जैसे सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों से अपेक्षा और अधिक होती है कि वे स्वयं यातायात नियमों का पालन कर समाज के सामने उदाहरण प्रस्तुत करें। साथ ही, यदि तस्वीरों को लेकर कोई नियम उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित विभाग को तथ्य स्पष्ट करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।अब असली सवाल यही है—क्या यातायात विभाग आम राहगीर की तरह ही इन तस्वीरों में दिखाई दे रहे नियम उल्लंघन की भी जांच और कार्रवाई करेगा?कानून की विश्वसनीयता तभी कायम रहेगी, जब उसका पैमाना आम नागरिक से लेकर मंत्री और राजनीतिक पदाधिकारी तक समान हो।

 

#सेवा_यात्रा #क्या_गजब_की_सेवा_यात्रा #यातायात_नियम #कानून_सबके_लिए_बराबर #कानून_का_समान_पालन #बिना_हेलमेट #यातायात_नियमों_की_अनदेखी #ट्रैफिक_नियम #सड़क_सुरक्षा #सड़क_पर_स्टंट #सत्ता_का_रसूख #राजनीतिक_रसूख #जनप्रतिनिधि #नेताओं_की_जवाबदेही #पुलिस_प्रशासन #यातायात_पुलिस #पुलिस_की_जवाबदेही #आम_राहगीर #आम_जनता #जनता_का_सवाल #कानून_की_समानता #निष्पक्ष_कार्रवाई #जवाबदेही #सत्ता_और_व्यवस्था #कानून_का_सम्मान #हेलमेट_जरूरी #ट्रैफिक_रूल्स #TrafficRules #RoadSafety #LawForAll #EqualLaw #Accountability #PublicSafety #ChhattisgarhNews #CGNews #JanjgirChampa #JanjgirNews #Chhattisgarh #BreakingNews #LatestNews #NewsUpdate #जनता_सब_देख_रही_है #सवाल_तो_बनता_है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button