बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे के बीच महिला मोर्चा विवाद चर्चा मेंजांजगीर-चांपा भाजपा में फिर विवाद! महिला मोर्चा में भ्रमण खर्च को लेकर आरोप-प्रत्यारोप, जिला संगठन की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल।

जांजगीर-चांपा जिले में भाजपा के भीतर संगठनात्मक मतभेदों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इस बार प्रदेश महिला मोर्चा कार्यसमिति सदस्य श्रीमती पूजा राठौर और महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष श्रीमती संतोषी सिंह के बीच भ्रमण के खर्च और कथित आर्थिक लेनदेन को लेकर विवाद सामने आया है। पूजा राठौर ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए इस मामले पर सवाल उठाए हैं। वहीं, पूरे प्रकरण ने महिला मोर्चा के आपसी समन्वय और जिला भाजपा में संगठनात्मक अनुशासन को लेकर भी बहस छेड़ दी है।
श्री मति पूजा राठौर से किसी पार्टी कार्यकता से बात का रिकॉर्डिंग जिससे स्पष्ट होता है कि संगठन द्वारा राशि उपलब्ध कराई गई थी।
भ्रमण के खर्च को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद?
प्रदेश कार्यसमिति सदस्य महिला मोर्चा श्री मति पूजा राठौर के अनुसार, संबंधित भ्रमण व्यक्तिगत था और उसका खर्च स्वयं वहन किया जाना था। इसी बीच उन्हें जानकारी मिली कि भ्रमण के लिए किसी भाजपा नेता की ओर से आर्थिक सहयोग किया गया है। इस जानकारी के बाद उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण जानना चाहा। श्री मति पूजा राठौर का आरोप है कि उन्हें न तो संतोषजनक जानकारी मिली और न ही अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना पक्ष सार्वजनिक किया। जबकि महिला मोर्चा की अधिकृत ग्रुप महामंत्री द्वारा जानकारी डाला गया न कि व्यक्तिगत भ्रमण था ।
वहीं, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष श्रीमती संतोषी सिंह के बयान में महिला मोर्चा और दुर्गा वाहिनी से जुड़ी पदाधिकारी श्रीमती अंजू गबेल के नाम पर पैसों के लेनदेन का उल्लेख होने की बात सामने आई है। हालांकि, इस मामले में आर्थिक लेनदेन की वास्तविकता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
जिला भाजपा में पहले भी उठ चुके हैं आर्थिक लेनदेन के सवाल
महिला मोर्चा के इस विवाद के बीच जिला भाजपा से जुड़े पुराने आरोप भी चर्चा में आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भाजपा जिला अध्यक्ष अंबेश जांगड़े के नेतृत्व वाले संगठन को लेकर पहले भी कथित आर्थिक लेनदेन के आरोप लगाए जाने की बात सामने आई थी। इनमें एल्डरमैन के नाम पर ढाई लाख रुपये की कथित वसूली, जिला चिकित्सालय से जुड़े वाहनों में डीजल खर्च और मंदिर निर्माण से संबंधित कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दे शामिल हैं जो खुब वायरल हुआ था बाद में डिलीट कर दिया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उनके संबंध में किसी जांच या कार्रवाई के निष्कर्षों की जानकारी स्पष्ट होना जरूरी है। ऐसे में इन दावों को स्थापित तथ्य के बजाय आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पामगढ़ क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के इस्तीफे ने भी बढ़ाई चर्चा
बताया जा रहा है कि पूर्व में आरोप लगाने वाले कुछ कार्यकर्ताओं ने बाद में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। आरोपों के बाद सामने आए इन इस्तीफों को लेकर संगठन के भीतर संवाद, असंतोष और शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस्तीफे के वास्तविक कारणों और पूर्व के आरोपों के बीच संबंध की पुष्टि संबंधित कार्यकर्ताओं के स्पष्ट बयान के बिना नहीं की जा सकती।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे के बीच महिला मोर्चा विवाद चर्चा में
भाजपा महिला सशक्तीकरण और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों के माध्यम से महिलाओं को जागरूक और संगठित करने की बात करती है। ऐसे में महिला मोर्चा की पदाधिकारियों के बीच सार्वजनिक रूप से आरोप-प्रत्यारोप सामने आना संगठन के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। सवाल यह है कि क्या महिला कार्यकर्ताओं के बीच पैदा हुए मतभेदों का समाधान संगठनात्मक स्तर पर समय रहते किया जा रहा है? क्या कार्यकर्ताओं की शिकायतों को सुनने और उनका निष्पक्ष निराकरण करने की कोई प्रभावी व्यवस्था है?
जिला अध्यक्ष ने क्या कहा?
इस पूरे प्रकरण पर भाजपा जिला अध्यक्ष अंबेश जांगड़े ने कहा कि दोनों पक्षों की जानकारी संगठन के उच्च पदाधिकारियों को दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन गतिविधियों में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
आगे संगठन के सामने बड़ी चुनौती।
लगातार सामने आ रहे विवादों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब निगाहें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं। संगठन इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करता है या फिर विवाद आपसी आरोपों तक ही सीमित रह जाता है, यह आने वाले समय में सामने आएगा।
राजनीतिक दृष्टि से भी संगठनात्मक एकजुटता महत्वपूर्ण है। जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र में पिछले चुनावों के परिणामों को लेकर भाजपा के प्रदर्शन की समीक्षा और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होती रही है। ऐसे में आंतरिक मतभेदों का समाधान संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, मौजूदा विवादों का आगामी विधानसभा या लोकसभा चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन अभी समय से पहले होगा।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इन विवादों पर संज्ञान लेकर कार्यकर्ताओं के बीच विश्वास बहाल करेगा और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर स्पष्ट कदम उठाएगा?












