जांजगीर चांपा

जांजगीर में ट्रैफिक पुलिस पर 12 हजार रुपये की वसूली का आरोप, 96 हजार के चालान का दबाव बनाकर पेट्रोल पंप के स्कैनर से कराया भुगतान!

 

जांजगीर में यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ओवरलोड डस्ट से भरे हाईवा वाहन पर कार्रवाई नहीं करने के एवज में 12 हजार रुपये लेने का आरोप तीन आरक्षकों पर लगा है। आरोप है कि 96 हजार रुपये का चालान भरने का दबाव बनाया गया और करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद कथित तौर पर 12 हजार रुपये में मामला निपटाया गया। हैरानी की बात यह है कि रकम सीधे लेने के बजाय एचपी श्री हरि कृपा एनर्जी पेट्रोल पंप के यूपीआई स्कैनर पर भुगतान कराया गया। 13 अक्टूबर की रात 8 बजकर 20 मिनट के कथित डिजिटल लेनदेन का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है। आरोपों में आरक्षक छोटेलाल अजगल्ले, सुनील राजपूत और धर्मेंद्र तिवारी के नाम सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि भुगतान के बाद आरक्षक छोटेलाल अजगल्ले पेट्रोल पंप मैनेजर से कथित तौर पर नकद रकम लेने पहुंचे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच का निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

जांजगीर यातायात नियमों का पालन कराने और ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी संभालने वाले ट्रैफिक पुलिस विभाग पर ही अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला 13 अक्टूबर की शाम हथनेवरा चौक के पास फोरलेन पर वाहन चेकिंग के दौरान का बताया जा रहा है।आरोपों के मुताबिक, चांपा की ओर से डस्ट भरकर बिर्रा की तरफ जा रहे एक हाईवा वाहन को ट्रैफिक पुलिस ने रुकवाया। इसके बाद वाहन ओवरलोड होने और मासिक एंट्री फीस जमा नहीं होने की बात कहकर कार्रवाई का दबाव बनाया गया। कथित तौर पर चालक को 96 हजार रुपये की पेनल्टी भरने की बात बताई गई और वाहन को कार्रवाई के लिए ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

 

तीन घंटे की मशक्कत, 96 हजार के चालान का दबाव और फिर 12 हजार का कथित लेनदेन!

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे गंभीर आरोप यह है कि करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद कथित तौर पर 12 हजार रुपये में मामला निपटाने की बात तय हुई। आरोप है कि रकम सीधे नकद लेने के बजाय एचपी श्री हरि कृपा एनर्जी पेट्रोल पंप के यूपीआई स्कैनर के जरिए जमा कराई गई। वायरल बताए जा रहे स्क्रीनशॉट के अनुसार, 13 अक्टूबर की रात करीब 8 बजकर 20 मिनट पर भुगतान किया गया।आगे आरोप है कि भुगतान पेट्रोल पंप के खाते में पहुंचने के बाद आरक्षक छोटेलाल अजगल्ले ने पेट्रोल पंप मैनेजर से नकद रकम प्राप्त की। यदि यह पूरा घटनाक्रम जांच में सही पाया जाता है, तो यह केवल यातायात नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं, बल्कि कानून लागू करने वाली व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल होगा।

सबूत से बचने के लिए स्कैनर का इस्तेमाल किए जाने का आरोप

इस मामले में एक और सवाल उठ रहा है कि यदि भुगतान की रकम किसी पेट्रोल पंप के स्कैनर के जरिए मंगाई गई, तो इसके पीछे क्या वजह थी? आरोप लगाया जा रहा है कि डिजिटल भुगतान के बाद नकद रकम लेने का तरीका अपनाया गया, ताकि लेनदेन का सीधा संबंध संबंधित आरक्षकों से सामने न आए। हालांकि, इस मंशा की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।यह भी जांच का विषय है कि संबंधित पेट्रोल पंप के खाते में इस तरह के और कितने भुगतान आए, किन लोगों ने रकम जमा की और क्या ऐसे अन्य मामलों में भी इसी तरह का तरीका अपनाया गया था। डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड, पेट्रोल पंप के खाते, सीसीटीवी फुटेज, संबंधित मोबाइल और ड्यूटी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच से मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है।

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अब पुलिस कप्तान की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

इस घटनाक्रम ने जिले की यातायात व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस विभाग का दायित्व ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई करना है, उसी विभाग के कर्मचारियों पर कार्रवाई से बचाने के बदले रकम लेने का आरोप लगना गंभीर मामला है।अब देखना होगा कि जिले के पुलिस कप्तान इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या वायरल स्क्रीनशॉट और कथित लेनदेन की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? क्या संबंधित आरक्षकों और पेट्रोल पंप के रिकॉर्ड की पड़ताल होगी? और यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो क्या जिम्मेदारों पर कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होगी?फिलहाल, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और पुलिस विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है। लेकिन इस मामले ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—अगर नियमों का पालन कराने वाले ही नियमों को ताक पर रखने के आरोपों में घिर जाएं, तो आम जनता यातायात व्यवस्था पर भरोसा कैसे करे?

हालांकि लगातार शिकायतें बढ़ रही और कई ऐसे सबूत है जो पैसा लेनदेन और मारपीट कर दबाव बनाने वाला वीडियो ऑडियो के साथ फोन पे का रिकॉर्ड जो जांजगीर का एक किराना स्टोर में करोड़ो रुपये ट्रैफिक जवानों ने अवैध वसूली के राशि ट्रांजेक्साशन कराए है  जिससे ऐसे वर्दीधारी जल्द बे नकाब होंगे

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