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अवकाश पर गए 3 कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर उठे सवाल, समिति अध्यक्ष पर मनमानी का आरोप

सेवा सहकारी समिति पोंडीदल्हा में कार्रवाई को लेकर विवाद

जांजगीर-चाम्पा। सेवा सहकारी समिति पोंडीदलहा (अकलतरा) में 3 कर्मचारियों को बर्खास्त किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संस्था प्रबंधक भारतेंदु सिंह, कंप्यूटर ऑपरेटर अजय श्रीवास और चौकीदार हर प्रसाद के खिलाफ बिना सूचना अनुपस्थित रहने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की गई है। वहीं कर्मचारियों का पक्ष सामने आए बिना की गई इस कार्रवाई को लेकर समिति अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि संस्था का प्रभार ऐसे व्यक्ति को सौंपे जाने का उल्लेख प्रस्ताव में किया गया है, जिसकी स्वयं की उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामला कोऑपरेटिव बैंक अकलतरा शाखा के अंतर्गत आने वाली सेवा सहकारी समिति पोंडी दलहा का है। बताया गया कि समिति अध्यक्ष देव कुमार अघरिया ने तीनों कर्मचारियों के 18 अगस्त से अनुपस्थित रहने की शिकायत उप पंजीयक कार्यालय में की थी। इसके बाद 25 अगस्त को संस्था की कार्यवाही पंजी में प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसमें तीनों कर्मचारियों को बिना सूचना अनुपस्थित पाए जाने के आधार पर सेवा से पृथक करने तथा संस्था का प्रभार राकेश सिंह को सौंपने का उल्लेख किया गया। प्रस्ताव में छत्तीसगढ़ सहकारी समिति अधिनियम 1960 की धारा 55(1) के प्रावधानों के तहत कंडिका 16.5(2) के अनुसार सेवा से पृथक किए जाने की कार्रवाई का उल्लेख किया गया। कार्यवाही पंजी में समिति अध्यक्ष देव कुमार अगरिया और सहायक विस्तार अधिकारी अकलतरा अमरनाथ राठौर के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। हालांकि, कोऑपरेटिव बैंक अकलतरा शाखा के तत्कालीन प्रभारी देवेंद्र द्विवेदी के अवकाश पर होने के कारण उस समय कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

शाखा प्रबंधक के तबादले के बाद दोबारा प्रस्ताव

आरोप है कि इसके बाद शाखा प्रबंधक देवेंद्र द्विवेदी का स्थानांतरण हो गया और कुछ ही दिनों में उनकी जगह नए शाखा प्रबंधक की पदस्थापना हो गई। इसके बाद 10 सितंबर को कार्यवाही पंजी में पुनः प्रस्ताव तैयार कर तीनों कर्मचारियों को बर्खास्त करने की कार्रवाई आगे बढ़ाने की बात सामने आई है।

अनुपस्थित बताए गए व्यक्ति को ही प्रभार देने पर भी सवाल

पूरे मामले में सबसे अहम सवाल संस्था का प्रभार राकेश सिंह को सौंपे जाने को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि राकेश सिंह फरवरी 2026 से अब तक उपस्थिति पंजी में स्वयं अनुपस्थित दर्ज हैं। ऐसे में लंबे समय से अनुपस्थित बताए जा रहे व्यक्ति को संस्था का प्रभार सौंपने का निर्णय किस आधार पर लिया गया, इसे लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में कर्मचारियों की अनुपस्थिति, प्रस्ताव की प्रक्रिया, प्रभार सौंपने तथा शाखा प्रबंधक के स्थानांतरण से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई की वैधानिकता और पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

बर्खास्तगी की धारा पर ही उठे सवाल

मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आ रहा है कि छत्तीसगढ़ सहकारी समिति अधिनियम 1960 की धारा 55(1) के उपबंध 16.5(2) गंभीर कदाचरण की श्रेणी से संबंधित बताया जा रहा है, जबकि तीनों कर्मचारियों की बर्खास्तगी का आधार बिना सूचना अनुपस्थित रहना बताया गया है, जिसे सामान्य कदाचरण की श्रेणी में रखा गया है। सामान्य कदाचरण के लिए उपबंध 16..5(2) के तहत परिनिंदा, चेतावनी अथवा नुकसान की भरपाई वेतन से किए जाने जैसे दंड का प्रावधान बताया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सामान्य कदाचरण के आरोप में गंभीर कदाचरण से संबंधित प्रावधान के तहत सीधे सेवा से पृथक करने की कार्रवाई किस आधार पर प्रस्तावित की गई? क्या संबंधित कर्मचारियों को नियमानुसार अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया? प्रावधानों की अलग-अलग प्रकृति के बावजूद की गई कथित एकपक्षीय कार्रवाई ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।

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