कन्या विवाह योजना में नाबालिग व फर्जीवाड़े के आरोप, चांपा-नवागढ़ मामला भी चर्चा में।

शिवरीनारायण में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 23 जोड़ों का सामूहिक विवाह पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न कराया गया। मंच से जनप्रतिनिधियों ने नवदंपत्तियों को आशीर्वाद दिया और योजना को गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत बताया गया।
लेकिन शिवरीनारायण में हुए इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम को लेकर अब गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों और स्थानीय लोगों का कहना है कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर प्रत्येक हितग्राही परिवार से लगभग 5 हजार रुपये तक की वसूली की जा रही है। आरोप है कि सुपरवाइजर और कुछ कार्यकर्ता मिलकर रकम लेते हैं और कमीशन का खेल ऊपर तक पहुंचता है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि शासन गरीब बेटियों के विवाह के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, फिर भी हितग्राहियों से पैसे क्यों वसूले जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि टेबल के नीचे लेन-देन का पूरा नेटवर्क सक्रिय रहता है और जिम्मेदार अधिकारी जानकर भी कार्रवाई नहीं करते।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े के आरोप लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अब मामले में नाबालिग युवती को योजना का लाभ दिलाने और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ किए जाने का सनसनीखेज आरोप सामने आया है।सूत्रों के मुताबिक, सामूहिक विवाह आयोजन में शामिल एक युवती कथित रूप से नाबालिग थी, लेकिन उसे पात्र दिखाने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया गया। आरोप है कि दाखिल-खारिज और अन्य रिकॉर्ड में उम्र संबंधी प्रविष्टियों में छेड़छाड़ कर उसे योजना का लाभ दिलाने योग्य बनाया गया।मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार कर्मचारियों, सहायिका और सुपरवाइजर की मिलीभगत से पूरा खेल हुआ। शिकायतों और रिकॉर्ड सामने आने के बावजूद मामले को दबाने और लेनदेन कर लीपापोती करने के भी आरोप सामने आ रहे हैं।इससे पहले भी पहले से शादीशुदा जोड़ों को योजना में शामिल करने, गर्भवती महिलाओं के विवाह कराने और रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं।
इसी बीच चांपा के दादी सती मंदिर में हुए सामूहिक विवाह को लेकर भी नया मामला चर्चा में है। आरोप है कि कई सेक्टर के कार्यकर्ता सहायिका अपने रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने के लिए सुपरवाइजर के साथ मिलकर बड़े स्तर पर हेराफेरी की गई। बताया जा रहा है कि इसमें भी चयन और दस्तावेज प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।अब लगातार सामने आ रहे इन आरोपों ने पूरी योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहा जा रहा है कि इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य मीडिया के पास मौजूद हैं, जिनके आधार पर बड़ा खुलासा होने की संभावना है।











