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जिला में रेत घोटाले पर बड़ा खुलासा—अवैध घाटों से हर माह लाखों का खेल, सीएम से नामजद शिकायत की तैयारी

जांजगीर-चांपा : जिला में दर्जनों रेत घाटों में एक बार फिर अवैध रेत उत्खनन और कथित कमीशनखोरी के गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा आज मुख्यमंत्री को सौंपे जाने वाले शिकायत पत्र में बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें खनिज विभाग से लेकर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।सूत्रों के अनुसार, हसदेव नदी और महानदी के विभिन्न रेत घाटों में ठेका प्रक्रिया के बावजूद अवैध उत्खनन का सिलसिला थम नहीं रहा है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क को सिंडिकेट के माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर अधिकारियों की मिलीभगत भी शामिल है।सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आ रही है कि हर अवैध घाट से प्रतिमाह करीब 5 से 6 लाख रुपये तक का कमीशन वसूला जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह राशि अलग-अलग स्तरों पर बंटती है, जिसमें खनिज विभाग से जुड़े अधिकारी और अन्य जिम्मेदार तंत्र भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिकायत में इन्हें विस्तार से उल्लेखित किए जाने की बात कही जा रही है।इधर, कई घाटों में रॉयल्टी क्लियर नहीं होने के कारण वैध खनन शुरू नहीं हो पाया है, जिससे ठेकेदार भी असमंजस में हैं। इस स्थिति का फायदा उठाकर रेत माफिया खुलेआम नदी से रेत निकालकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। नतीजतन, शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि अवैध कारोबारियों की कमाई लगातार बढ़ रही है।प्रशासन द्वारा गठित टास्क फोर्स की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है—कभी-कभार कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर दी जाती हैं, लेकिन बड़े स्तर पर चल रहे अवैध उत्खनन पर कोई ठोस असर नहीं पड़ता।बताया जा रहा है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से तैयार की जा रही शिकायत में कुछ जनप्रतिनिधियों के नाम भी शामिल किए गए हैं, जिन पर इस पूरे नेटवर्क को संरक्षण देने के आरोप हैं। यदि यह शिकायत आधिकारिक रूप से सामने आती है, तो जिले की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा भूचाल आ सकता है।मामले को लेकर मीडिया भी पूरी तरह सक्रिय है और आज शिवरीनारायण में होने वाले कार्यक्रम के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने की तैयारी है। ऐसे में अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायत के बाद प्रशासन और सरकार क्या रुख अपनाती है।स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और अवैध रेत उत्खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि नदियों का अस्तित्व और सरकारी राजस्व दोनों सुरक्षित रह सकें।

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