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विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस केमिकल वाले नैपकिन छोड़ सूती और बायो-डिग्रेडेबल पैड्स अपनाएं महिलाएं।

विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस
केमिकल वाले नैपकिन छोड़ सूती और बायो-डिग्रेडेबल पैड्स अपनाएं महिलाए

विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर समाज एवं पर्यावरण कार्यकर्ता काजल कसेर ने महिलाओं को मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों और बाजारवाद के प्रति जागरूक रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि महिलाएं केमिकल युक्त सैनिटरी नैपकिन की बजाय स्वच्छ सूती कपड़े और बायो-डिग्रेडेबल पैड्स का उपयोग करें, ताकि गंभीर बीमारियों से बचा जा सके और पर्यावरण को भी नुकसान न पहुंचे।

काजल कसेर ने बताया कि बाजार में मिलने वाले कई सैनिटरी नैपकिन में प्लास्टिक, थैलेट्स और डाइ-ऑक्सीन जैसे हानिकारक तत्व पाए जाते हैं, जो महिलाओं के शरीर में हार्मोनल असंतुलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इन उत्पादों के उपयोग से पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ता है, क्योंकि ये आसानी से नष्ट नहीं होते।

उन्होंने यह भी कहा कि मासिक धर्म का रक्त गंदा या अशुद्ध नहीं होता, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से इसमें ऐसे बैक्टीरिया और कोशिकाएं होती हैं जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मददगार हो सकती हैं। पीरियड्स के दौरान होने वाले संक्रमण का मुख्य कारण गंदा पानी, अस्वच्छ वातावरण और गंदे कपड़ों का उपयोग होता है। इसलिए महिलाओं को स्वच्छता और सुरक्षित विकल्पों को अपनाने की जरूरत है।

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