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सुरक्षा माह में असुरक्षा का तमाशा, स्टंटबाजी करने वालों को मिली खुली छूट, तमाशबिन बने चौक चौराहे पर लगे यातयात के जवान।

सुरक्षा माह में असुरक्षा का तमाशा, स्टंटबाजी करने वालों को मिली खुली छूट, तमाशबिन बने चौक चौराहे पर लगे यातयात के जवान।

शहर में यातायात सुरक्षा माह के दौरान जिस तरह नियमों को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, उसी के उलट तस्वीर शहर के बीच देखने को मिली। ऑटोमोबाइल्स के प्रचार के दौरान निकाले गए वाहनों के काफिले में खुलेआम स्टंटबाजी की गई, जिससे न सिर्फ यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई बल्कि आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ गई।बताया जा रहा है कि संबंधित ऑटोमोबाइल्स के खिलाफ पहले भी सड़क पर वाहन खड़े करने और यातायात बाधित करने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद इन्हें शहर के बीच प्रचार और स्टंटबाजी की खुली छूट दी गई। चलती गाड़ियों की छत और खिड़कियों पर खड़े होकर स्टंट करना किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकता था।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यातायात पुलिस हर चौराहे पर नियमों का पाठ पढ़ा रही है, तब इस तरह की गतिविधियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। आम जनता का कहना है कि नियम अगर सबके लिए समान हैं, तो फिर इस मामले में नरमी क्यों बरती गई।यातायात सुरक्षा माह का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रेरित करना है, लेकिन इस तरह की घटनाएं पूरे अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े करती हैं। अब जरूरत है कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों की पहचान करे और नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई करे, ताकि यातायात सुरक्षा माह सिर्फ औपचारिकता बनकर न रह जाए।

यातायात सुरक्षा माह के तहत पुलिस द्वारा हेलमेट नहीं पहनने, ट्रिपल सवारी करने और नशे की हालत में वाहन चलाने वालों के खिलाफ लगातार चालानी कार्रवाई की जा रही है। शहर के अलग-अलग चौराहों और मुख्य मार्गों पर प्रतिदिन जांच अभियान चलाए जा रहे हैं।हालांकि, चालानी कार्रवाई की जल्दबाजी में कई ऐसे वाहन चालक भी यातायात जवानों के निशाने पर आ रहे हैं, जिनकी किसी प्रकार की कोई गलती नहीं होती। इसके बावजूद उन्हें रोका जा रहा है और कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। इससे आम नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है।एक ओर जहां खुलेआम स्टंटबाजी और यातायात अव्यवस्था फैलाने वाले मामलों में कार्रवाई नहीं हो रही, वहीं दूसरी ओर नियमों का पालन करने वाले लोग भी चालानी कार्रवाई के शिकार बन रहे हैं। इस स्थिति ने यातायात जवानों की मुस्तैदी और निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।अब आम लोगों का कहना है कि यातायात सुरक्षा माह का उद्देश्य नियमों का सख्ती से पालन कराना है, न कि बेवजह आम नागरिकों को परेशान करना। जनता की मांग है कि कार्रवाई में पारदर्शिता बरती जाए और वास्तविक नियम तोड़ने वालों पर ही सख्त कदम उठाए जाएं।

 

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