जांजगीर की शिक्षिका काजल कसेर को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान, शिक्षा के साथ सामाजिक नवाचार को मिला राष्ट्रीय मंच।

जांजगीर की शिक्षिका काजल कसेर को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान, शिक्षा के साथ सामाजिक नवाचार को मिला राष्ट्रीय मंच।
जांजगीर। जांजगीर जिले की शिक्षिका एवं जय भारत स्कूल में कार्यरत पीजीटी काजल कसेर को शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, सामाजिक जागरूकता और जनहित के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा अँजोर भारत द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान शिक्षा को समाज से जोड़ने और विभिन्न जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाने में उनके योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है।काजल कसेर ने शिक्षण कार्य के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, महिला स्वास्थ्य, बालिका सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर लगातार अभियान चलाए हैं। उन्होंने “मेरा जांजगीर, हरा जांजगीर” अभियान के माध्यम से सैकड़ों युवाओं को वृक्षारोपण से जोड़ते हुए हजारों पौधों के रोपण एवं संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाई।महिलाओं और किशोरियों में मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से उन्होंने “रजोशक्ति महाभियान” की शुरुआत की। इस अभियान के तहत उन्होंने अपनी स्वलिखित पुस्तक “सुर्ख लाल; प्रेमी या राक्षस?” हजारों बालिकाओं और महिलाओं को निःशुल्क वितरित की। साथ ही गांवों और शहरों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर मासिक धर्म, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी दी।बालिकाओं की सुरक्षा और आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए उन्होंने “निर्भया आत्मसुरक्षा शिविर” का आयोजन कर सेल्फ-डिफेंस प्रशिक्षण उपलब्ध कराया। वहीं प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के बीच गुड टच-बैड टच विषय पर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित कर बाल सुरक्षा के प्रति भी महत्वपूर्ण पहल की।हाल ही में काजल कसेर ने “हर रेड इज़ ग्रीन” नामक पुस्तक भी लिखी है, जिसमें मासिक धर्म, प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल पीरियड्स की अवधारणा को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों को पर्यावरण-अनुकूल मासिक धर्म प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित करना है।राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान मिलने पर जिले के शिक्षकों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने काजल कसेर को शुभकामनाएं देते हुए इसे जांजगीर-चांपा जिले के लिए गौरव का क्षण बताया। शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में उनके योगदान को अब राष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिली है।












