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प्राधिकृत अधिकारी सेवा सहकारी समितियों में अपने रिश्तेदारों की नियम विरुद्ध नियुक्ति कराने बना रहे सत्ता का बड़ा दबाव।

प्राधिकृत अधिकारी सेवा सहकारी समितियों में अपने रिश्तेदारों की नियम विरुद्ध नियुक्ति कराने बना रहे सत्ता का बड़ा दबाव

 

जिले की सेवा सहकारी समितियों में कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद सामने आ रहा है। प्राधिकृत अधिकारियों पर आरोप है कि वे सत्ता का दबाव बनाकर अपने सगे संबंधियों और रिश्तेदारों को नियम विरुद्ध नियुक्ति दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।जानकारी के अनुसार, कई समितियों में नियुक्ति प्रक्रिया अभी अधूरी है, लेकिन इसके बावजूद अंदरखाने जोड़-तोड़ तेज हो गई है। आरोप है कि प्राधिकृत अधिकारी एड़ी-चोटी का जोर लगाकर अपने करीबियों के नाम आगे बढ़वा रहे हैं।सूत्रों का कहना है कि इस दबाव के चलते योग्य और पात्र अभ्यर्थियों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, कुछ अधिकारी नियमों का हवाला देकर पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन पर भी शिकायत और कार्रवाई की धमकी का दबाव बनाया जा रहा है।

जिले में यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। सहकारी व्यवस्था से जुड़े लोगों और आम नागरिकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि नियुक्तियों में ही नियमों की अनदेखी होगी, तो व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहेगा।

ज्वलंत सवाल

क्या सेवा सहकारी समितियों में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है?

क्या सत्ता और दबाव के बल पर नियमों को दरकिनार किया जा रहा है?

क्या योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिल पाएगा?

यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों का दखल नहीं हुआ, तो आशंका है कि प्राधिकृत अधिकारी अपने रिश्तेदारों और सगे संबंधियों को नियुक्ति दिलाकर ही दम लेंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या सख्त कदम उठाता है।

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