ऑनलाइन कार्य के विरोध में पटवारी संघ का आंदोलन स्थगित, सरकार ने पहले ही मान ली थी मांगें, स्थापना दिवस के दिन नोटिस जारी होने से बदली आंदोलन की दिशा।
जांजगीर-चांपा लंबे समय से ऑनलाइन कार्य व्यवस्था का विरोध कर रहे पटवारी संघ ने आखिरकार अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। आंदोलन के ऐलान से पहले ही सरकार ने उनकी प्रमुख मांगें मान ली थीं। इसके बावजूद आंदोलन की जिद पटवारियों को महंगी पड़ी और सरकार की सख्त कार्यवाही के संकेत ने संगठन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।सूत्रों के अनुसार, जांजगीर-चांपा जिले में 142 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इस कार्यवाही ने प्रदेश भर के पटवारियों में खलबली मचा दी। संघ को साफ समझ आ गया कि यदि आंदोलन जारी रहा तो सरकार और भी कठोर कदम उठा सकती है। नतीजा यह हुआ कि प्रदेश पटवारी संघ ने सरकार द्वारा मांग पूरी करने के बावजूद आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया।इसी बीच पटवारी संघ ने हाल ही में अपना स्थापना दिवस भी मनाया। संघ का दावा था कि प्रदेश भर से 1000 से अधिक पटवारी इस आयोजन में शामिल हुए। लेकिन यह आयोजन भी विवादों में घिर गया। दरअसल, यह दिन कार्यालयीन कार्य का दिन था, फिर भी स्थापना दिवस को बड़े राजनीतिक रंग में मनाया गया। कार्यक्रम में किसी भी अधिकारी को आमंत्रण नहीं दिया गया। जबकि सामान्यतः ऐसे अवसर उल्लास और सद्भाव का प्रतीक होते हैं। राजनीतिकरण की वजह से यह आयोजन भारी पड़ गया और इसके बाद ही बड़ी कार्यवाही की जमीन तैयार हो गई।कर्मचारियों का कहना है कि यदि स्थापना दिवस का आयोजन सामान्य तरीके से होता और आंदोलन को समय रहते समाप्त कर दिया जाता, तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। लेकिन आंदोलन और स्थापना दिवस दोनों का राजनीतिकरण अंततः पटवारियों के लिए मुश्किलें लेकर आया।ग्रामीण अंचलों में राजस्व कार्य पर आंदोलन का सीधा असर पड़ा। किसानों और आम नागरिकों को कई दिनों तक पटवारी अनुपलब्ध रहने से परेशानी उठानी पड़ी। अब आंदोलन स्थगित होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि कामकाज सामान्य गति पकड़ लेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि पटवारी संघ का आंदोलन और उसका अचानक स्थगन संगठन की मजबूरी का नतीजा है। सरकार पहले ही उनकी मांग मान चुकी थी। बावजूद इसके आंदोलन की राह पर बढ़ना न केवल अनुचित था, बल्कि इससे संगठन की छवि को भी धक्का पहुंचा है। स्थापना दिवस का विवादित आयोजन इस पर और भारी पड़ गया।












