मूसलाधार बारिश के बीच जांजगीर के हाई स्कूल ग्राउंड में रासेश्वरी देवी जी का ‘उपनिषद ज्ञानामृत’ प्रवचन, बारिश की बूंदों के बीच भी आध्यात्मिक ज्ञान सुनने उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बारिश ने रोका रास्ता, आस्था ने नहीं…

जांजगीर में रासेश्वरी देवी जी के प्रवचन को सुनने हाई स्कूल ग्राउंड पहुंचते रहे श्रद्धालु, मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य और ईश्वर ज्ञान पर हुई विस्तार से चर्चा जांजगीर जांजगीर के हाई स्कूल ग्राउंड में शुक्रवार को पूजनीया रासेश्वरी देवी जी के ‘उपनिषद ज्ञानामृत’ प्रवचन श्रृंखला का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के दौरान मौसम ने भी जमकर करवट ली और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, लेकिन बारिश भी श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर सकी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बारिश के बीच कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और रासेश्वरी देवी जी के आध्यात्मिक प्रवचन को पूरे मनोयोग से सुना।पंचम मौलिक जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रमुख प्रचारिका रासेश्वरी देवी जी ने अपने प्रथम प्रवचन में उपनिषदों की महत्ता बताते हुए मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में वेदों को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है और उपनिषद उन्हीं वेदों का सार हैं। उपनिषद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवात्मा, परमात्मा और माया के स्वरूप को समझने तथा जीवन के वास्तविक लक्ष्य की ओर बढ़ने का मार्ग दिखाते हैं।प्रवचन की शुरुआत कठोपनिषद के मंत्र “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत” से हुई। रासेश्वरी देवी जी ने मंत्र की व्याख्या करते हुए कहा कि मनुष्य को अज्ञान की नींद से जागने की आवश्यकता है। मनुष्य बाहरी संसार के क्षणिक सुखों की तलाश में जीवन गुजार देता है, जबकि वास्तविक शांति और आनंद की दिशा भीतर की आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी है।उन्होंने मानव शरीर की महत्ता पर भी विस्तार से चर्चा की। बताया कि मनुष्य के पास विवेक है, जिसके माध्यम से वह सही और गलत का भेद समझ सकता है। इसके साथ ही मनुष्य को कर्म करने की स्वतंत्रता प्राप्त है और अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त होता है। आहार, निद्रा, भय और विषय-भोग जैसी प्रवृत्तियां मनुष्य और पशुओं में समान होने के बावजूद विवेक और कर्म की विशेषता मानव जीवन को महत्वपूर्ण बनाती है।
रासेश्वरी देवी जी ने कहा कि जब तक आत्मा संसार के क्षणिक सुखों को ही जीवन का अंतिम लक्ष्य मानती रहेगी, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है। ईश्वर को जानने और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की दिशा में आगे बढ़ना ही मानव जीवन की सार्थकता है।
8 अक्टूबर तक चलेगा ‘उपनिषद ज्ञानामृत’
जांजगीर के हाई स्कूल ग्राउंड में 25 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक ‘उपनिषद ज्ञानामृत’ प्रवचन श्रृंखला जारी रहेगी। कार्यक्रम में प्रवेश निःशुल्क रखा गया है। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं और आध्यात्मिक ज्ञान में रुचि रखने वाले जिज्ञासुओं से प्रवचन में शामिल होने की अपील की है।
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