सामूहिक कन्या विवाह योजना में कमीशनखोरी और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप, सुशासन त्योहार में गूंजेगा मामला।

जांजगीर-चांपा जिला इन दिनों लगातार विवादों और विभागीय गड़बड़ियों को लेकर चर्चा में बना हुआ है। इस बार मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत शिवरीनारायण में संपन्न हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा जमकर “हाथ आजमाने” के आरोप सामने आ रहे हैं।सामूहिक विवाह आयोजन में हितग्राहियों से अवैध वसूली, कमीशनखोरी और अपात्र लोगों को लाभ दिलाने के आरोप अब गंभीर रूप लेते जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कल भड़ेसर में आयोजित सुशासन त्योहार में कई हितग्राही परिवार विभाग के खिलाफ शिकायत करने की तैयारी में हैं।सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों, सहायिका और सुपरवाइजर की मिलीभगत से योजना में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं। शिकायतों और दस्तावेज सामने आने के बावजूद मामले को दबाने और लेनदेन कर लीपापोती करने की चर्चा भी जोरों पर है।इसी बीच गौद सेक्टर से भी बड़ा मामला सामने आया है। हितग्राहियों के परिजनों ने मीडिया को बताया कि सुपरवाइजर, कार्यकर्ता और सहायिका द्वारा प्रत्येक हितग्राही से 5-5 हजार रुपये की मांग की गई। आरोप है कि कुछ राशि एडवांस में ली गई, जबकि बाकी रकम चेक खाते में आने के बाद देने की बात कही गई।वहीं महंत सेक्टर के एक पंचायत से भी चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पूर्व में सामाजिक रीति-रिवाज से विवाह हो चुके हितग्राही को भी योजना का लाभ दिलाया गया। आरोप है कि कमीशन लेकर अपात्र हितग्राही को योजना में शामिल किया गया।इसके अलावा चांपा के दादी सती मंदिर में हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम को लेकर भी नवागढ़ सेक्टर के एक पंचायत में सहायिका के रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने के लिए सुपरवाइजर के साथ मिलकर बड़े स्तर पर हेराफेरी किए जाने की चर्चा है।लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि परियोजना अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी की जानकारी या मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर अनियमितताएं संभव नहीं लगतीं।इधर, हाल ही में बलौदा ब्लॉक के पीएम श्री स्कूल की प्राचार्य पर शिकायत के बाद हुई निलंबन कार्रवाई ने भी विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।बताया जा रहा है कि पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य और कई हितग्राहियों के बयान मीडिया के पास मौजूद हैं। यदि निष्पक्ष जांच होती है तो मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है।











