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13 हजार की सैलरी कागजों में, हाथ में सिर्फ 5 हजार!”निजी स्कूल में शोषण का आरोप

13 हजार की सैलरी कागजों में, हाथ में सिर्फ 5 हजार!”

जीएलडी पब्लिक स्कूल खैरताल पर शिक्षिका का बड़ा आरोप — वेतन हेराफेरी, मानसिक प्रताड़ना और बिना नोटिस नौकरी से निकाला

जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड स्थित जीएलडी पब्लिक स्कूल खैरताल एक गंभीर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। स्कूल की शिक्षिका गीता महंत ने स्कूल संचालक पंकज कुमार देवांगन और प्राचार्य डॉ. शिव पुजन पांडे पर वेतन हेराफेरी, मानसिक प्रताड़ना, पीएफ राशि जमा नहीं करने, शासकीय अवकाश में जबरन काम कराने और बिना नोटिस नौकरी से निकालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की लिखित शिकायत विकासखंड शिक्षा अधिकारी नवागढ़, कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी, महिला थाना और नवागढ़ थाना में की गई है। शिकायत सामने आने के बाद निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली और शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

शिकायत पत्र के मुताबिक, गीता महंत 15 अगस्त 2021 से जीएलडी पब्लिक स्कूल खैरताल में शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं। उन्हें प्रतिमाह 13,336 रुपये वेतन पर नियुक्त किया गया था। लेकिन शिक्षिका का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा वेतन का बड़ा हिस्सा अलग-अलग खातों में ट्रांसफर दिखाकर वापस ले लिया जाता था और वास्तविक रूप से उन्हें केवल 5,000 रुपये ही दिए जाते थे।

शिकायत में दावा किया गया है कि हर महीने 8,336 रुपये की राशि अलग-अलग खातों के माध्यम से ट्रांसफर कराई जाती थी। इसमें मेघा उपाध्याय, गेलाराम कश्यप, विवेक मोटर्स और नीलू कुमार साहू जैसे नामों का उल्लेख भी किया गया है। आरोप है कि रिकॉर्ड में अधिक वेतन दिखाने के लिए यह पूरा खेल किया जाता था, जबकि शिक्षकों को वास्तविक भुगतान बेहद कम किया जाता था।

“5000 में काम करना पड़ेगा, शासन को दिखाना पड़ता है…”

शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने इस व्यवस्था पर सवाल उठाया, तो स्कूल प्रबंधन ने साफ शब्दों में कहा कि —

पंकज देवांगन संचालक

 

शिव पुजन पाण्डे (प्राचार्य)

“5000 रुपये में ही काम करना पड़ेगा, बाकी राशि लौटाकर कोई एहसान नहीं कर रही हो… हमें शासन को दिखाना पड़ता है कि टीचर को 13,336 रुपये दे रहे हैं।”

 

यह आरोप निजी स्कूलों में कथित वेतन घोटाले और शिक्षकों के आर्थिक शोषण की गंभीर तस्वीर पेश करता है। शिक्षिका ने यह भी कहा कि उनसे निर्धारित समय से अधिक कार्य कराया जाता था और शासकीय अवकाशों में भी स्कूल बुलाया जाता था।

छुट्टी मांगना पड़ा भारी, बिना नोटिस नौकरी से निकाला

गीता Mahant ने शिकायत में बताया कि 1 अप्रैल 2026 को उनके घर में सगाई का कार्यक्रम था, जिसके लिए उन्होंने 31 मार्च को छुट्टी का आवेदन दिया था। आरोप है कि इसके बाद स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और बिना किसी नोटिस अथवा सूचना के नौकरी से निकाल दिया।

 

जब उन्होंने नौकरी से निकाले जाने का कारण पूछा, तो कथित तौर पर कहा गया —

“हमें तुम्हें बताने की जरूरत नहीं है, जो करना है कर लो… दोबारा विद्यालय आने की आवश्यकता नहीं है।”

पीएफ राशि जमा नहीं करने का भी आरोप

शिक्षिका ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके पीएफ की राशि आज तक जमा नहीं की गई। शिकायत में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए छलपूर्वक कार्य किया और उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन किया। शिकायत के साथ शिक्षिका ने आईडी कार्ड, नियुक्ति प्रमाण पत्र, अनुभव प्रमाण पत्र, परीक्षा कार्य मुक्ति प्रमाण पत्र, छुट्टी आवेदन और व्हाट्सएप चैट की प्रतियां भी संलग्न की हैं।

अब शिक्षा विभाग पर उठ रहे सवाल

मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि यदि निजी स्कूलों में शिक्षकों को कम वेतन देकर कागजों में अधिक भुगतान दिखाया जा रहा था, तो विभागीय निरीक्षण में यह सब अब तक पकड़ में क्यों नहीं आया?

हालांकि बीईओ नवागढ़ ने मामले में जांच की बात कही है, लेकिन अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या फिर निजी स्कूलों में चल रहे कथित शोषण के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई भी होती है।

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