सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट बनता जा रहा है पंचायत कर्मचारियों की गले की फांस।

जांजगीर-चांपा::जाज्वल्य न्यूज़::कांग्रेस सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नरवा गरूवा घुरवा बारी योजना अंतर्गत गौठान को मूर्त रूप देने किसानों को रोजगार देने गोबर खरीदी को बड़ा प्रोत्साहन दिया जा रहा था,एक ओर गांव में पशुओं की कमी और दुसरे तरफ सरकार के साथ प्रशासन के मौखिक आदेश से अधिक गोबर खरीदी करने ऊपर से दबाव बनाया जा रहा है जबकि आज के समय में गांव में गोबर मिलना दूभर हो चुका है, किसान अभी गोबर किसी कीमत पर बेचना नही चाह रहे है, चूंकि वर्तमान में बेचा हुआ गोबर की राशि ना मिलना और किसान द्वारा फसल कटने बाद साल भर के लिए स्वयं के लिए कंडा बना कर रखना है। सरकार जिस तरह डिंग हाक रहे थे कि हमने गोबर खरीदी कर गांव में रोजगार पैदा कर दिए हैं,और किसानो की अमदानी बढ़ गया है जबकि गोबर बेचने किसान बिल्कुल रुचि नही ले रहे है,और सरकार की ड्रीम प्रोजेक्ट कागजों में ही सिमटते नजर आ रही है।

गोबर खरीदी से वर्मी बेचने तक साल भर से ज्यादा समय तक भूगतान नही मिलने से नहि दिखा रहे कार्य में रुचि।
महिला समूह सहायता को एक वर्ष से अधिक समय से ज्यादा बीतजाने के बाद भी आज तक नहीं मिल पाया गोबर खरीदी और वर्मी बिक्री का पैसा जिससे अब गांवों में महिलाएं काम करने किसी प्रकार की रुचि नहीं ले रहे हैं। सरकार ने नगद खरीदी करने निर्देश दिए और हुआ भी यही लेकिन कोऑपरेटिव बैंक द्वारा अब तक खाता में राशि नही भेजा गया है आखिर कब तक सब्र करे ग्रामीण महिला।

गौठान निर्माण में ठेकादार मालामाल।
गोठान निर्माण से संचालित होने तक किसी प्रकार की सरपंच एवं चुने गए गौठान अध्यक्षों की जिम्मेदारी अब तक तय नहीं हुआ है। जबकि करोड़ों की लागत गौठान निर्माण के लिए सरकार द्वारा पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है,गौठान में फैंसिंग कार्य से कई तरह के शेड निर्माण सहित सभी जरूरत कि सामग्री पूर्ति कर बड़े अधिकारियो या मंत्रियों के रिश्तेदार ही चांदी काट रहे है, जबकि सरपंच इस पर मूकदर्शक मात्र बने हुए है। इस कारण सरपंचों को नही रहा गौठान संबंधी कार्य में रुचि। साथ ही चुने गए गौठान अध्यक्ष नाम मात्र के रह गए है उनको आज तक ना प्रशिक्षण ना कार्य करने को कोई अधिकार मिला है।
पंचायत सचिव अतिरिक्त कार्य करने मजबूर।
गौठान संबंधित संपूर्ण कार्य की सचिव निभा रहे जिम्मेदारी, सरकार द्वारा गोबर खरीदी के लिए फरमान जारी किया गया है गोबर खरीदी के बाद 40% वर्मी देना अनिवार्य नही तो होगा वसूली,पंचायत सचिव के आईडी से गोबर खरीदी किया जा रहा है जबकि पंचायत सचिव के पास ग्राम पंचायत के कार्य पहले से ही अधिक है, अब गोबर खरीदी का अतिरिक्त दबाव है।
कृषि विभाग के बिना कैसे बनेगा वर्मी।
गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाना कृषि विभाग का कार्य है, विभाग में कृषि कार्य के लिए पहले से प्रशिक्षित कर्मचारियो होते है, जबकि इस पर कृषि विभाग के अधिकारी सचिव या महिला समूह के भरोसे छोड़ देते है कार्य और समय पर नियत मानक रूप से नही बन पाता वर्मी जिसका खामियाजा पंचायत सचिव को भुगतना पड़ता है।












