जांजगीर चांपा

महिला ASI की कार्यशैली पर गंभीर सवाल 30 जून की FIR के बाद भी आरोपी गिरफ्तार नहीं, पीड़ित परिवार ने लगाए देरी और लापरवाही के आरोप

महिला ASI की कार्यशैली पर गंभीर सवाल: 30 जून की FIR के बाद भी आरोपी गिरफ्तार नहीं, पीड़ित परिवार ने लगाए देरी और लापरवाही के आरोप

जांजगीर-चांपा। जिले में महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक विजय पाण्डेय द्वारा महिला थाना की व्यवस्था को मजबूत करने की पहल की गई है। लेकिन महिला थाना में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक (ASI) प्रतिभा राठौर की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि 30 जून को एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई, जबकि मामला गंभीर प्रकृति का है और आरोपी का पता भी पुलिस को है।

मामला हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने घर में घुसकर मारपीट की और जबरदस्ती करने का प्रयास किया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि मेडिकल परीक्षण में हाथ, पैर सहित निजी अंगों पर गंभीर चोट की पुष्टि हुई है। इसके बावजूद आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहा है।

पीड़िता की मां का आरोप है कि घटना के चार दिन बाद बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया, लेकिन पूरे दिन महिला थाना में बैठाने के बाद बिना बयान दर्ज किए वापस भेज दिया गया। उनका कहना है कि विवेचना में लगातार देरी हो रही है, जिससे आरोपी को राहत मिलने की आशंका है।

जब इस संबंध में ASI श्रीमति प्रतिभा राठौर से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि लगातार अन्य शासकीय ड्यूटी में व्यस्त रहने के कारण मामले में समय नहीं मिल पाया।

वहीं महिला थाना प्रभारी श्री मति सतरूपा तारम ने कहा कि मामले में एफआईआर दर्ज है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पीड़ित परिवार का कहना है कि महिला थाना का उद्देश्य महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाना है, लेकिन इस मामले में कार्रवाई की धीमी रफ्तार से न्याय मिलने में देरी हो रही है। उनका यह भी कहना है कि यदि किसी पुलिस अधिकारी की कार्यशैली के कारण महिला अपराधों की विवेचना प्रभावित हो रही है और पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है, तो ऐसे अधिकारी की जिम्मेदारी की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए।

पीड़ित परिवार का मानना है कि महिला थाना जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण थाने में केवल ऐसे अधिकारियों की पदस्थापना होनी चाहिए जो महिला अपराधों में संवेदनशीलता, तत्परता और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। यदि जांच में लापरवाही या कर्तव्य में चूक सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी को वहां से हटाकर जिम्मेदार अधिकारी की पदस्थापना करना महिला सुरक्षा और त्वरित न्याय के हित में होगा।

हाल ही में नशे में धुत दूल्हे की बारात लौटाने वाली युवती मुस्कान को पुलिस द्वारा सम्मानित किया गया था। ऐसे में पीड़ित परिवार सवाल उठा रहा है कि एक ओर महिलाओं के सम्मान की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर गंभीर मामले की पीड़िता न्याय के लिए भटकने को मजबूर क्यों है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button