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सामूहिक कन्या विवाह योजना में बड़ा खेल,30 अप्रैल को हो चुकी थी शादी, फिर 8 मई के सामूहिक विवाह में शामिल कर दिलाया सरकारी लाभ ? शादी कार्ड और शाही बारात ने खोली साजिश की परतें।

जांजगीर-चांपा जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक निर्धन कन्या विवाह योजना को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। शिवरीनारायण में 8 मई को आयोजित सामूहिक कन्या विवाह कार्यक्रम में ऐसे जोड़े को शामिल किए जाने का आरोप लगा है, जिसकी शादी सामाजिक रीति-रिवाज से पहले ही संपन्न हो चुकी थी। मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, सुपरवाइजर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं। खुलासे के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और अब पूरे जिले की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

सिउड गांव निवासी आंचल और विकेश का विवाह 30 अप्रैल को सामाजिक रीति-रिवाज से पूरे धूमधाम के साथ संपन्न हो चुका था। शादी में भैंसमुड़ी गांव के चर्चित डीजे की व्यवस्था की गई थी, वहीं राछाभाठा से किराए में शाही रथ में दूल्हे का आगमन दुल्हन के घर हुआ था। गांव में पारंपरिक रस्मों और बारात के साथ विवाह कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

इसके बावजूद 8 मई को शिवरीनारायण में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक निर्धन कन्या विवाह योजना में दोनों को फिर से शामिल कर सरकारी लाभ दिलाने की तैयारी की गई। बताया जा रहा है कि सरकारी योजना का फायदा दिलाने के नाम पर दोनों को झांसे में लिया गया और अब वे खुद एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा बनकर जोखिम में पड़ गए हैं।

मामले का सबसे बड़ा खुलासा शादी कार्ड से हुआ। शादी कार्ड सामने आने के बाद यह साफ हो गया कि विवाह सामूहिक कार्यक्रम से कई दिन पहले ही हो चुका था। कार्ड और शादी समारोह से जुड़े तथ्यों ने पूरे मामले की पोल खोल दी और कथित रूप से शामिल जिम्मेदार लोगों को बेनकाब कर दिया।

सूत्रों की मानें तो गौद सेक्टर में लंबे समय से योजना के नाम पर फर्जी हितग्राहियों को शामिल कर सरकारी राशि का बंदरबांट किया जा रहा था। चर्चा है कि प्रति हितग्राही 5 हजार से 15 हजार रुपए तक की वसूली की जाती थी। आरोप है कि कार्यकर्ता, सहायिका, सुपरवाइजर और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल संचालित हो रहा था।स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित परियोजना अधिकारी का नाम इससे पहले अकलतरा और पामगढ़ क्षेत्र में हुए विवादों में भी सामने आ चुका है। अब रिटायरमेंट से पहले बड़े पैमाने पर फर्जी तरीके से लोगों को योजना का लाभ दिलाकर सरकारी राशि के दुरुपयोग की चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं सुपरवाइजर के कई पुराने कारनामों को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

इधर कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के बीच भी नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि दबाव बनाकर योजना में नाम जोड़े जाते थे और गड़बड़ियों की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती थी।इस पूरे मामले ने जिले की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जिलेवासियों की नजर जिला प्रशासन और कलेक्टर की कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों का कहना है कि जब-जब जिले में भ्रष्टाचार या गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं, तब-तब कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई कर मिसाल पेश की है। ऐसे में इस मामले में भी निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।

लोगों की मांग है कि मामले की जांच विभागीय अधिकारियों से हटाकर किसी स्वतंत्र अधिकारी या अन्य विभागीय टीम से कराई जाए, ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके। माना जा रहा है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कई और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं और योजना में लंबे समय से चल रहे कथित भ्रष्टाचार की परतें खुल सकती हैं।फिलहाल पूरे जिले को अब प्रशासनिक कार्रवाई और जांच रिपोर्ट का इंतजार है, क्योंकि मामला सिर्फ सरकारी राशि के दुरुपयोग का नहीं, बल्कि गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है।

मीडिया ने जब गांव और क्षेत्र में तहकीकात किया तो कई दस्तावेज ऐसे मिले जो संलिप्त लोगों के पैर तले जमीन खिसका दे जिसका खुलासा अगला एपिसोड में जल्द होगा खुलेंगे कार्यकर्ता सुपरवाइजर और परियोजना अधिकारी कई फर्जी दस्तावेज।

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