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घर के बाहर लिखा ‘मानसिक रोगों के लक्षण’ का स्लोगन और 15 साल की जेल भी नहीं बदल सकी सोनसाय की सोच, 20 साल पुराने संपत्ति विवाद में बेटे गोलू संग मिलकर उजाड़ दिया पूरा परिवार।

घर के बाहर लिखा ‘मानसिक रोगों के लक्षण’ का स्लोगन और 15 साल की जेल भी नहीं बदल सकी सोनसाय की सोच, 20 साल पुराने संपत्ति विवाद में बेटे गोलू संग मिलकर उजाड़ दिया पूरा परिवार

जांजगीर-चांपा जिले के भवंतरा गांव में हुई चारहरी हत्या अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रही, बल्कि यह रिश्तों के टूटने, लालच, बदले और वर्षों से मन में पलती नफरत की भयावह कहानी बन चुकी है। पुलिस खुलासे में साफ हो गया है कि करीब 20 साल पुराने संपत्ति विवाद ने आखिरकार पूरे परिवार को खत्म कर दिया।इस हत्याकांड की सबसे मार्मिक और विडंबनापूर्ण तस्वीर उस घर की है, जिसके बाहर बड़े अक्षरों में लिखा है — “मानसिक रोगों के लक्षण”। नीचे मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन, लोगों से दूरी बनाना और इलाज से जुड़ी बातें लिखी हैं। यह स्लोगन शायद रोज आरोपी सोनसाय कश्यप और उसके पुत्र गोलू की नजरों के सामने आता रहा होगा, लेकिन अफसोस… दीवार पर लिखे शब्द भी उनके भीतर पल रही बदले की आग और घृणा को खत्म नहीं कर सके।बताया जा रहा है कि इसी संपत्ति विवाद ने वर्षों पहले परिवार की खुशियां छीन ली थीं। रंजिश इतनी गहरी हो चुकी थी कि पहले छोटे भाई की हत्या हुई, जिसमें सोनसाय को सजा हुई और उसने करीब 15 साल जेल में बिताए। वहीं परिवार का बड़ा भाई भी जिंदगी से हारकर वर्षों पहले आत्महत्या कर चुका था।ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जेल की सलाखों के पीछे बीते लंबे साल शायद सोनसाय के भीतर का गुस्सा खत्म कर देंगे। लोग मान रहे थे कि समय के साथ रिश्तों के जख्म भर जाएंगे। परिवार बिखरने के बाद शायद बची हुई जिंदगी शांति से गुजर जाएगी।

लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

ग्राम सरपंच राजाराम कश्यप ने बताया कि जब वह पूर्व में सरपंच थे, उसी दौरान सोनसाय ने अपने छोटे भाई की हत्या की थी। जेल से छूटने के बाद पिता ने उसका हिस्सा का जमीन-जायदाद भी बांट दिया था, ताकि विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाए। बावजूद इसके सोनसाय के मन की रंजिश खत्म नहीं हुई।

पुलिस खुलासे में सामने आया कि सोनसाय और उसके पुत्र गोलू ने मिलकर पिता पीताम्बर कश्यप, मां शांति बाई, नाती मेदनी प्रसाद कश्यप और मासूम कुमारी मोगरा की निर्मम हत्या कर दी। जिस परिवार के साथ कभी एक ही आंगन में बचपन बीता, उसी परिवार को खत्म करने की यह वारदात पूरे जिले को झकझोर गई है।

आज भवंतरा गांव में सिर्फ मातम पसरा है। जिस घर में कभी रिश्तों की आवाज गूंजती थी, वहां अब सन्नाटा है।

ग्रामीणों की आंखों में एक ही सवाल तैर रहा है

अगर 20 साल पहले यह विवाद खत्म हो जाता…अगर जमीन से ज्यादा रिश्तों को महत्व दिया जाता…तो क्या आज पूरा परिवार जिंदा होता?

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