जांजगीर जिला न्यायालय में विशेष लोक अदालत की तैयारी को लेकर समीक्षा बैठक, 21 नवंबर को चेक बाउंस मामलों का होगा निराकरण।

जांजगीर-चांपा : जिला न्यायालय जांजगीर में आगामी 21 नवंबर 2026 को आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत चेक बाउंस के लंबित मामलों के त्वरित निराकरण और अधिक से अधिक प्रकरणों को आपसी समझौते के माध्यम से सुलझाने पर चर्चा की गई।राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जांजगीर के मार्गदर्शन में आयोजित इस बैठक में न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने भाग लिया।बैठक में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण मिश्रा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मनोज कुमार कुशवाहा, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अंजू कंवर एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नॉवेल पन्ना उपस्थित रहे। इसके अलावा जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी एवं अधिवक्ता भी शामिल हुए।बैठक के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण मिश्रा ने कहा कि धारा 138 के अंतर्गत चेक बाउंस के लंबित मामलों का आपसी समझौते से निराकरण करने के लिए विशेष लोक अदालत एक महत्वपूर्ण अवसर है। इससे पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलेगी और उनके समय एवं धन की बचत होगी।वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मनोज कुमार कुशवाहा ने अधिवक्ताओं से अपील की कि वे अपने पक्षकारों को विशेष लोक अदालत के माध्यम से विवादों का समाधान कराने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने अधिक से अधिक मामलों का आपसी सहमति से निराकरण सुनिश्चित करने में अधिवक्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।बैठक में विशेष लोक अदालत की तैयारियों की समीक्षा करते हुए लंबित प्रकरणों में नोटिस तामील की स्थिति पर चर्चा की गई। साथ ही पेशी के माध्यम से राजीनामा योग्य मामलों की पहचान कर उन्हें समझौते के लिए तैयार करने की रूपरेखा बनाई गई। उपस्थित अधिवक्ताओं ने 21 नवंबर को आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत को सफल बनाने के लिए पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।विशेष लोक अदालत के माध्यम से चेक बाउंस के मामलों में आपसी सहमति से समाधान का रास्ता आसान होने की उम्मीद है। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने के साथ ही पक्षकारों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने मेंमदद मिलेगी।












