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नर सेवा ही नारायण सेवा है – प्रबल प्रताप सिंह जूदेव

हरीश कुमार राठौर

जांजगीर-चाम्पा। स्वामी विवेकानंद के महान विचार नर ही नारायण है और नर सेवा ही नारायण सेवा है को साकार करता हुआ भारतीय कुष्ठ निवारण संघ, कात्रेनगर चाम्पा का आश्रम आज मानव सेवा, करुणा और सामाजिक पुनर्वास का एक आदर्श केंद्र बन चुका है। वर्षों से कुष्ठ पीड़ितों एवं वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित यह आश्रम मानवीय गरिमा की पुनर्स्थापना का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।इसीक्रम में कल प्रबल प्रताप सिंह जूदेव का कात्रेनगर आश्रम में प्रथम आगमन हुआ। उन्होंने आगमन उपरांत विधिवत श्री सिद्धि विनायक के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं सेवा कार्यों की निरंतरता के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात आश्रम की सेवाओं, गतिविधियों एवं पुनर्वास कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी  सुधीर देव  द्वारा दी गई। उन्होंने बताया कि आश्रम में कुष्ठ पीड़ितों के लिए सुरक्षित आवास, नियमित चिकित्सा सुविधा, सामाजिक एवं मानसिक पुनर्वास, स्वावलंबन हेतु कौशल प्रशिक्षण तथा आजीविका से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। आश्रम का उद्देश्य पीड़ितों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। श्री जूदेव ने आश्रम परिसर का भ्रमण कर वहां निवासरत लाभार्थियों एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं से संवाद किया तथा आश्रम द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कात्रेनगर आश्रम सेवा, संवेदना और समर्पण का सशक्त प्रतीक है, जहां मानव सेवा को ही ईश्वर आराधना का स्वरूप माना जाता है।इस अवसर पर घनश्याम तिवारी, इंजी. रवि पांडेय, लक्की पांडेय, श्रीमती अंजू गबेल सहित आश्रम से जुड़े पदाधिकारी, समाजसेवी, स्थानीय नागरिक एवं सेवाकर्मी उपस्थित रहे। सभी उपस्थित जनों ने आश्रम के कार्यों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। गौरतलब है कि भारतीय कुष्ठ निवारण संघ, कात्रेनगर–चांपा का यह आश्रम निरंतर सेवा, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के माध्यम से यह संदेश दे रहा है कि मानव सेवा ही सच्ची साधना है। आज यह आश्रम क्षेत्र के साथ-साथ समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है।

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