
कैलाश कश्यप/ हरीश कुमार राठौर
कटे हुए गले
चिथड़े हुए शरीर
बिखरी हुई लाशें
अब नहीं होंगी…
गोलियों से छलनी सीना
बारूद से उड़े पैर
स्पाइक से बिंधे तलुए
अब नहीं होंगे…
खून से सनी सड़के
वायर बिछी हुई राहें
टूटे हुए पुल
अब नहीं होंगे…
हवा मे बारूद की गंध
पेड़ों पर धोखे का सामन
पानी मे जहर
अब नहीं होंगे…
बूढ़ी मां के सूखे आंसू
पत्नी का चित्कार
बाप का गुमसुम चेहरा
अब नहीं होंगे…
बच्चों के फुले हुए पेट
कांवर मे आते हुए बीमार
इलाज की लाचारी
अब नहीं होंगे…
100 जगह कटी हुई सड़क
टूटे हुए स्कूल
ध्वस्त बिजली के खम्भे
अब नहीं होंगे…
साल के पत्तों की सरसराहट
हवा मे महुए की खुश्बू
झरने के गिरने का दृश्य
अब होंगे…
स्कूलो से आती पहाड़े की आवाज़े
राहों मे चलते पहिये
रोशन होते गांव
अब होंगे…
निर्भय घूमते लोग
पुस्तक पकड़े बच्चे
मुस्कराती माताएं
अब होंगे….
विजय कुमार पाण्डेय
पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चाम्पा












